Uttarakhand Mahotsav: लखनऊ की धरती पर उत्तराखंड की छटा... डॉ. मंजू बाला को मिला उत्तराखण्ड गौरव सम्मान
लखनऊ, अमृत विचार: परंपरागत परिधानों और आभूषणों से सजी महिलाओं के झोड़े के 30 दल ढाल, तलवार, मसकबीन, तुरही, रणसिंहा लिए परिसर में उतरे तो लखनऊ में उत्तराखंड की छटा बिखर गई।
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उधांचल कला केन्द्र अल्मोड़ा के छोलिया दल और कुमाऊं रेजीमेंट के बैंड आयोजन में चार चांद लगा दिए। मौका था 10 दिवसीय उत्तराखंड महोत्सव की शुरुआत का।
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गोमती तट स्थित पं. गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में रविवार को संस्कृति और पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने महोत्सव का उद्घाटन किया। डॉ. मंजू बाला को उत्तराखण्ड गौरव सम्मान भी दिया गया।
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महोत्सव में सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत वंदना से हुई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। 250 महिलाओं ने गोलाकार में एक साथ झोड़े की प्रस्तुति से इंद्रधनुषी छटा बिखेर दी। सुभाष देवराड़ी के नेतृत्व में थराली चमोली से आए कलाकारों ने पाडव पारंपरिक लोक नृत्य से महाभारत के प्रसंगों को दर्शाया। इस नृत्य में ढोल-दमाऊं जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर कलाकार पांडवों और पौराणिक पात्रों की वेशभूषा में महाभारत के प्रसंगों का मंचन किया गया।
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यह मनोरंजन के साथ-साथ लोक आस्था, धार्मिक भावना और संस्कृति का प्रतीक है। इसे अच्छी फसल और गांव की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की सलाहकार अवनीश अवस्थी, महापौर सुषमा खर्कवाल, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी और विधायक ओपी श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।
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महोत्सव में स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल
मीडिया प्रभारी राजेन्द्र सिंह कनवाल ने बताया कि महोत्सव में स्वदेशी उत्पादों की बहुलता है। संपूर्ण भारतीय समाज की विशेषताओं, खान-पान, वेश-भूषा, स्वदेशी को प्रोत्साहित करने का कार्य महापरिषद महोत्सव के माध्यम से किया जा रहा है।
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हस्त निर्मित बुनकारी के उत्पाद, हिमाचल और लद्दाख के खरगोश के बिना कटे कंघे द्वारा प्राप्त बालों से बने शाल, उड़ीसा के आदिवासी समुदाय से प्रीति दास के स्टॉल पर प्राकृतिक रेशम की काजीवरम् साड़ी, शॉल, गर्म कपड़े, कश्मीरी शॉल, सूट, सदरी आदि तथा स्पेशल धूप-अगरबत्ती, पूजा सामग्री का स्टॉल भी है।
