स्मृति शेष : लोहा कारोबारी तो कभी नूर मोहम्मद बने गोपाल अवस्थी..., ज़िद पर न अड़ते तो शायद कानपुर महानगर के सांसद होते
शैलेश अवस्थी/कानपुर l कानपुर में भाजपा के संस्थापक ज़िलाध्यक्ष धुरंदर नेता गोपाल अवस्थी रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए l वह आपातकाल के दौरान भूमिगत रहकर, वेश बदलकर संपर्क करते, कार्यकर्ताओं को संगठित करते और जनता समाचार अख़बार वितरित करते थेl
1980 में जब भाजपा का गठन हुआ तो कानपुर के ज़िलाध्यक्ष का दायित्व गोपाल अवस्थी को सौंपा गया था l हालांकि पार्टी के कुछ लोग राम चरन भारतिया को पहला और दूसरा अध्यक्ष गोपाल अवस्थी को बताते हैं l आपातकाल के दौरान जनसंघ के बड़े नेता जेल चले गए तो अवस्थी को संघर्ष समिति का संयोजक बनाकर आंदोलन की ज़िम्मेदारी दो गई, जिसे इन्होंने बखूबी निभायाl
इस दौरान वह वेश बदलकर घूमते, पार्टी के लोगों से संपर्क कर उन्हें संगठित करते और आपातकाल के खिलाफ प्रकाशित अख़बार "जनता समाचार" पूरे प्रदेश में वितरित करवाते थे l वह कभी दाढ़ी रखवाकर नूर मोहम्मद बने तो कभी लोहा कारोबारी बन बाज़ारों में घूमते रहते l कल्याणपुर में अपने को लोहा कारोबारी खंडेलवाल बता कर किराये में घर लिया और वहीं से आंदोलन संचालित करते थे l
आखिरकार सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तार कर लिए गए थे l यह बात उन्होंने जेल से रिहा होने के बाद खुद बताई थी l भाजपा का गठन हुआ तो उन्हें कानपुर का अध्यक्ष बनाया गया l इस पद पर सात साल रहते हुए कई आंदोलन किए और कार्यकर्ताओं के प्रिय बन गए l
1989 को लोकसभा, विधानसभा चुनाव एकसाथ हुए थे और गोपाल अवस्थी ने गोविन्दनगर क्षेत्र से टिकट मांगा l बताते हैं संघ ने बालचंद मिश्रा की सिफारिश की और उन्हें टिकट मिल गया l अवस्थी से कहा गया कि वह लोकसभा लड़ लें, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया और फिर जगतवीर सिंह द्रोण का नाम फ़ाइनल हो गया l

अटल और कल्याण सिंह के प्रिय
गोपाल अवस्थी अटल बिहारी वाजपेई और कल्याण सिंह के बेहद निकट थे l एक चुनावी सभा से पहले अटल बिहारी ने अवस्थी से कहा कि पहले चौक की लस्सी और मेस्टन रोड की इमरती खिलाओ, तब चुनाव जीतने के टिप्स देंगे l अटल जी ने उन्हें सुबह बिना दूध की चाय पीने की सलाह दी थी l कहा कि पेट निकल रहा है, ठीक करो l ये संस्मरण खुद गोपाल अवस्थी ने इस संवाददाता को सुनाए थे l
कई को नेता बनाया, खुद को कुछ खास नहीं मिला
गोपाल अवस्थी ने प्रेमलता कटियार सहित कई को भाजपा में बतौर नेता स्थापित किया l अपने स्वाभिमान और ज़िद के कारण वह बड़ी कुर्सी की दौड़ में पीछे रह जाते थे l वह न तो सांसद बन सके और न ही विधायक l गोपाल अवस्थी का जितना बड़ा कद था और पार्टी के लिए समर्पण, उन्हें उस तरह का ओहदा नहीं मिल सका lहां, एक बार उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर राज्य मंत्री का दर्ज़ा ज़रूर दिया गया था l उनका बहुत सम्मान था l नेता और कार्यकर्त्ता उनका बहुत सम्मान करते थे l वह कहते थे आखिरी सांस तक भाजपा में रहूंगा l
श्रद्धांजलि के लिए उमड़े भाजपाई, गार्ड ऑफ़ ऑनर
कानपुर l भाजपा के पूर्व ज़िलाध्यक्ष गोपाल अवस्थी के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्त्ता उनके रेलबाजार स्थित घर पहुंच गए l गोपाल अवस्थी की अंतिम यात्रा भगवतदास घाट पहुंची, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया l इसके पहले उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया l उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई l इस दौरान सांसद रमेश अवस्थी, विधायक नीलिमा कटियार, महेश त्रिवेदी, सुरेंद्र मैथानी, ज़िलाध्यक्ष अनिल दीक्षित, शिवराम सिंह, अनूप अवस्थी सहित कई नेता और कार्यकर्त्ता मौजूद रहे।
