आनंदम कार्यक्रम से बदलेगा स्कूली बच्चों का व्यक्तित्व, बोले संदीप सिंह- केस स्टडी और अनुभवात्मक शिक्षण से सीखेंगे जीवन के कौशल
लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में स्कूली शिक्षा का स्वरूप अब बदलने जा रहा है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की नई पहल ‘आनंदम’ के तहत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को अब केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें जीवन से जुड़े अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम अंतर्गत हर शैक्षणिक सत्र में 10 दिन बैगलेस दिवस के रूप में घोषित किए गए हैं, जिनमें बच्चे किताबों की जगह प्रयोग, भ्रमण और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेंगे।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को बताया कि बच्चों में अवलोकन, विश्लेषण, रचनात्मकता, तर्कशक्ति, श्रम की गरिमा और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करने पर विशेष जोर रहेगा। एससीईआरटी के निदेशक डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्थानीय उद्योग-व्यवसाय और कला-संस्कृति-इतिहास। प्रत्येक गतिविधि में स्थानीय कारीगर, विशेषज्ञ, अभिभावक और समुदाय की भागीदारी रखी जाएगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि ‘आनंदम’ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव मजबूत करेगी। ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘ओडीओपी’ से जुड़ाव के जरिए स्वदेशी उद्योगों की समझ बढ़ेगी। कौशल आधारित गतिविधियों से श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता का संवर्धन होगा। स्थानीय इतिहास, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की शिक्षा का प्रसार होगा। विद्यालय और समुदाय की साझेदारी से बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।
क्या है आनंदम कार्यक्रम
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से तैयार किए गए ‘आनंदम मार्गदर्शिका’ के आधार पर सभी 75 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत बैगलेस दिनों में विद्यार्थी विद्यालय में बिना बैग के आएंगे और शैक्षिक भ्रमण, कला-शिल्प, खेल, वैज्ञानिक गतिविधियों, स्थानीय व्यवसायों से परिचय तथा सामुदायिक सहभागिता जैसी गतिविधियों में शामिल होंगे। पहली बार, स्कूली स्तर पर बच्चे केस स्टडी के माध्यम से वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझेंगे और उनसे सीखेंगे।
