शहर में सजाए जा रहे लेदर के छोटे उत्पाद, विदेश में बनाएंगे अपनी पहचान
कानपुर, अमृत विचार। क्रिसमस पर विदेश में छोटे आकार उपहार इस बार प्रचलन में अधिक है। क्रिसमस ट्री के आसपास रखे जाने वाले यह उपहार लोग आपस में बांटते है। यही वजह है कि शहर के निर्यातकों को इस बार लेदर के छोटे उत्पादों के ऑर्डर सबसे अधिक मिले हैं। खास तौर पर पर्यटन के लिए माने जाने वाले सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों के लिए यह आर्डर शहर में बनकर लगभग पूरी तरह से तैयार है।
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अमेरिका की ओर से टैरिफ लगाए जाने के बाद शहर के लेदर उत्पाद निर्यातकों ने दूसरी विदेशी बाजार का रुख किया है। फिलहाल शहर के निर्यातक क्रिसमस के बाजार के लिए नए उत्पाद तैयार कर रहे हैं। क्रिसमस पर ऐसे देश जहां पर पर्यटन के लिए पूरे विश्व भर से लोग आते हैं, उन देशों के भी ऑर्डर शहर में तैयार हो रहे हैं।
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क्रिसमस पर एक दूसरे को उपहार दिए जाने के लिए वहां के खरीदारों ने खास तौर पर छोटे उत्पाद के आर्डर शहर के निर्यातकों को दिए हैं। इन देशों में पर्यटन के लिए घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक भी पहचान के तौर पर यह उत्पाद अपने देश में लेकर जाते हैं। इसके अलावा सीधेतौर पर एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) वाले देश जैसे नॉर्वे, लिचटेंस्टीन, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में भी शहर से छोटे लेदर उत्पाद जा रहे हैं।
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शहर के निर्यातकों का कहना है कि शहर के लेदर उत्पाद गुणवत्ता में बेहतर और अधिक दिन तक चलने की वजह से उनकी लोकप्रियता विदेश में बढ़ रही है। इसके अलावा निर्यातक यह भी कहते हैं कि नई बाजार में तलाश के लिए छोटे उत्पादों के निर्यातक विदेशी खरीदारों को कम रेट पर भी लेदर के उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं।
पूरे मामले पर सना इंटरनेशनल एग्जाम के निदेशक डॉ. जफर नफीस ने बताया कि क्रिसमस का बाजार शहर के निर्यातकों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। कई ऐसे विदेशी खरीदार है, जो क्रिसमस के बाजार के तौर पर शहर के छोटे निर्यातकों के संपर्क में आए हैं। शहर के निर्यातक भी इसे एक बड़ा मौका मन कर चल रहे हैं। उपहार का बाजार क्रिसमस पर विदेश में काफी बड़ा है। यही वजह है कि निर्यातकों ने इस और भी ऑर्डर हासिल किए हैं।
कारीगरों को रोजगारश्
छोटे और हाथ के बने लेदर के उत्पाद सबसे अधिक उपहारों को देने के लिए विदेश में पर्व के दौरान उपयोग होने हैं। ऐसे में इससे शहर के कारीगरों को भी रोजगार हासिल हो रहा है। खासतौर पर हाथ के बने लेदर के उत्पादों को बनाने वाले कारीगरों की युनिट्स को सबसे अधिक जरूरत है। शहर में इस तरह के लगभग 4 हजार कारीगर है जो फिलहाल टैरिफ की वजह से बगैर काम के हैं। इनमें सिर्फ 50 से 55 फीसदी को ही काम मिला है। निर्यातक मान रहे हैं कि क्रिसमस के बाद बाजार लगातार इन उत्पादों की मांग करती है तो सभी को दो से तीन महीनों के भीतर रोजगार हासिल हो सकेगा।
