धार्मिक आयोजन के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, एसटीएफ की आगरा यूनिट की टीम ने किया गिरोह का पर्दाफाश

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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महिला स्वास्थ्य मिशन ट्रस्ट के नाम की रसीदें, डेबिट व क्रेडिट कार्ड बरामद

लखनऊ, अमृत विचार : धार्मिक आयोजन के नाम पर महिलाओं और अन्य लोगों को संगठन से जोड़कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ की आगरा यूनिट ने गिरफ्तार किया है। गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है। आरोपी के पास से दो कारें, महिला स्वास्थ्य मिशन ट्रस्ट के नाम की रसीदें, कई क्रेडिट और डेबिट कार्ड तथा 10 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।

एसटीएफ के एएसपी राकेश के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी रवि प्रकाश मूल रूप से देवरिया के खुखुंदू थाना क्षेत्र के बहादुरपुर गांव का रहने वाला है। उसे आगरा के जगदीशपुरा थाना क्षेत्र में आवास विकास कालोनी, सेक्टर-6 स्थित महाजन कॉम्प्लेक्स से पकड़ा गया। गिरोह का सरगना अजय उर्फ बिल्लू मैनपुरी थाना कोतवाली क्षेत्र की गिहार कालोनी, नवीन मंडी का निवासी है, जिस पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं।

एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा के अनुसार रवि ने महिला स्वास्थ्य मिशन ट्रस्ट बना रखा था। उसकी आड़ में वह धार्मिक आयोजन कराता और गरीब महिलाओं व लोगों को सदस्य बनाता था। सदस्यता और आईडी कार्ड के नाम पर 50 से 100 रुपये लेता था। इसके बाद लालच देता कि ट्रस्ट के पास बड़ी धनराशि आती है, जो सदस्यों के खातों में जाएगी। इसी बहाने वह बैंक खाते, चेकबुक और हस्ताक्षर ले लेता था। साथ ही सदस्यों के नाम से सिम लेकर एटीएम कार्ड भी जारी करा लेता था। गिरोह इन्हीं खातों में साइबर फ्रॉड की रकम मंगवाकर निकालता था।

गिरोह ने आवास विकास कालोनी के ललित गर्ग और सतीश चंद्र सिंघल को भी इसी तरीके से जाल में फंसाया। ललित गर्ग के खाते में संदिग्ध रूप से बड़ी रकम आने पर खाता सीज हुआ, जिसके बाद उसने एसटीएफ से शिकायत की। जांच में गिरोह का खुलासा हुआ। सरगना अजय को मैनपुरी से हिरासत में लिया गया है, जबकि गिरोह का एक अन्य सदस्य एलिस निवासी पुनीत अपार्टमेंट, जयपुर हाउस अभी फरार है।

टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर होती थी बातचीत

पूछताछ में रवि ने बताया कि गिरोह के सदस्य आपस में व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिये ही संपर्क करते थे। धार्मिक आयोजनों और महिला स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रमों में वे निर्धन लोगों के मोबाइल नंबर और बैंक खाता विवरण हासिल कर लेते थे। अलग-अलग स्थानों से साइबर ठगी की रकम इन्हीं खातों में डलवाई जाती थी। नकद रुपये रवि के पास आते थे, जबकि ऑनलाइन हिस्सेदारी अजय और एलिस को मिलती थी।

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