संपादकीय :सार्थक संबोधन
अफ्रीका में सोवेटो टाउनशिप के पास जहां नेल्सन मंडेला का घर था, पहली बार आयोजित हो रहा जी-20 शिखर सम्मेलन ट्रंप के प्रखर विरोध के चलते ही नहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके दो सत्रों में दिए गए संबोधनों के कारण भी चर्चा में है। ये न केवल अत्यंत अर्थवान थे, बल्कि उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि आज भारत वैश्विक विमर्श को दिशा देने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री ने पुराने विकास मॉडल पर पुनर्विचार की जो अपील की वह अत्यंत दूरदर्शी और व्यावहारिक तथा समयोचित है।
दशकों से चल रहे विकास के फार्मूले अत्यधिक खपत, संसाधनों के भीषण दोहन तथा प्रकृति के प्रति उदासीनता से भरे हैं, जिन्होंने वैश्विक असमानता बढ़ाई है। पुराने मॉडल के हिसाब से चलें तो विकसित देशों की आर्थिक वृद्धि अक्सर विकासशील दुनिया के संसाधनों की कीमत पर होती है। इस असंतुलित मॉडल को बदलना अनिवार्य है, क्योंकि वर्तमान संकट- जलवायु से लेकर खाद्य असुरक्षा तक सभी इसी विफल दर्शन का परिणाम हैं। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव, खाद्य-ऊर्जा असुरक्षा और जलवायु जोखिम पर भारत का दृष्टिकोण बहुत प्रभावी तरीके से रखा।
उल्लेखनीय बात यह कि विभिन्न देशों के प्रतिनिधि उनकी वैश्विक विभाजन को पाटने और मल्टीलेटरलिज़्म को नया स्वरूप देने की आवश्यकता पर सहमत दिखे। उन्होंने माना कि भारत उभरती दुनिया और विकसित देशों के बीच एक भरोसेमंद सेतु की भूमिका निभा सकता है। मोदी द्वारा श्री अन्न यानी मोटे अनाज, जलवायु परिवर्तन, जी–20 सेटेलाइट डेटा पार्टनरशिप एवं डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर जो बातें कहीं वह जी–20 के लिए अत्यंत समीचीन मुद्दे हैं। कृषि, स्वास्थ्य, और आपदा प्रबंधन विश्वभर में चुनौतीग्रस्त हैं। ऐसे में मोटा अनाज पोषण, खाद्य सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु कृषि मॉडल का वास्तविक विकल्प है। इसी प्रकार, आपदाओं के पूर्वानुमान और प्रबंधन में सेटेलाइट डेटा की साझेदारी ऐसी पहल है जो विकासशील देशों को तकनीकी निर्भरता से मुक्त कर देगी।
मोदी ने वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार, ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ कार्रवाई और अफ्रीकी कौशल को बढ़ावा देने जैसी बातें उठाईं। पारंपरिक ज्ञान, विशेषकर भारत और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों का, आज सतत विकास और स्वास्थ्य सुरक्षा में अत्यधिक उपयोगी हो सकता है। वहीं, ड्रग-टेरर नेटवर्क पर चोट करने से आतंकवाद की फंडिंग स्वतः कमजोर होती है, क्योंकि वैश्विक आतंकवाद का बड़ा हिस्सा मादक पदार्थों की तस्करी पर निर्भर करता है। भारत ने पहली बार इस विषय को जी–20 जैसी आर्थिक मंच पर प्रमुखता से उठाकर इसकी सामरिक महत्ता को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल मुद्दों को उठाया, बल्कि समाधान-उन्मुख दृष्टि भी प्रस्तुत की। भारत ने यह संदेश दिया कि वह केवल एक उभरती शक्ति नहीं, बल्कि समाधान-प्रदाता देश है, इसलिए जी-20 में भारत की भूमिका को मजबूत, संतुलित और वैश्विक सहमति निर्माण में निर्णायक माना जाना चाहिए। अमेरिका की अनुपस्थिति के बावजूद जी-20 के देशों के रुख से लगता है कि सम्मेलन के प्रतिफलन पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
