आरएमसीएच से बीआईयू तक का सफर... जो रहेगा जारी
2006 में स्थापित हुआ था रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल लेकिन उच्च स्तरीय सेवाएं देने पर 2016 में बन गया बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का हिस्सा
बरेली, अमृत विचार। बात उस दौर की है जब चिकित्सा सेवा के नाम पर बरेली में चंद अस्पताल ही थे, मरीजों को जटिल बीमारियों के इलाज के लिए दूर-दराज जैसे लखनऊ और दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे थे लेकिन वर्ष 2006 में मरीजों के लिए संजीवनी रुपी किरण के रुप में रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आरएमसीएच) की स्थापना हुई।
इसके स्थापित होने से सिर्फ बरेली ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के साथ ही नेपाल के मरीजों को भी काफी सहूलियत मिली। यहां मरीजों को मिल रहे उच्च स्तरीय इलाज के चलते ही इसकी चमक शासन प्रशासन तक भी पहुंची इसका ही परिणाम रहा है कि वर्ष 2016 के 16 सितंबर को यूजीसी अधिनियम 1956 के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे विश्व विद्यालय की मान्यता प्रदान की। ये विश्वविद्यालय रोहिलखंड चैरिटेबल एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा प्रवर्तित है। अब यहां डॉक्टरी डिग्री, नर्सिंग, पैरा मेडिकल व फार्मेसी के साथ ही टेक्नीकल और मैनेजमेंट कोर्स भी संचालित हो रहे हैं।
ये है प्रबंधन का ध्येय : बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, कुलाधिपति डॉ. केशव कुमार अग्रवाल, प्रति कुलाधिपति डॉ. अशोक अग्रवाल, कुलपति डॉ. लता अग्रवाल, प्रति कुलपति डॉ. किरण अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में नित नये आयाम स्थापित कर रहा है। प्रबंधन का प्रयास विश्व स्तरीय संकायों, अवसंरचना, सुविधाओं और प्रौद्योगिकी के समुचित सहयोग से उन्नत शिक्षण और अनुसंधान वातावरण प्रदान करके अपने विद्यार्थियों को व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्ञान प्रदान करना और कौशल विकसित करना है।
