बढ़ती घरेलू हिंसा
केंद्र शासित प्रदेशों और 22 राज्यों में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) में पांच राज्यों की 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक एवं यौन हिंसा की शिकार पाई गई हैं। सर्वेक्षण के यह आंकड़े इसलिए चौंकाते हैं क्योंकि घरेलू हिंसा के खिलाफ सशक्त कानून बना हुआ है, इसके बावजूद लोगों …
केंद्र शासित प्रदेशों और 22 राज्यों में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) में पांच राज्यों की 30 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अपने पति द्वारा शारीरिक एवं यौन हिंसा की शिकार पाई गई हैं। सर्वेक्षण के यह आंकड़े इसलिए चौंकाते हैं क्योंकि घरेलू हिंसा के खिलाफ सशक्त कानून बना हुआ है, इसके बावजूद लोगों में कोई खौफ नहीं है।
सर्वेक्षण में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में सबसे खराब स्थिति बिहार, असम, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्यों में पाई गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, कर्नाटक में 18 से 49 आयु वर्ग की लगभग 44.4 प्रतिशत महिलाओं के साथ उनके पति द्वारा घरेलू हिंसा को अंजाम दिया गया।
महिलाओं के संरक्षण के लिए कड़े कानून बनने और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ने, उनके आत्मनिर्भर बनने के बाद भी हिंसा के मामले थमने या कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं तो चिंता लाजिमी हो जाती है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। खुद को स्थापित और साबित भी कर रही हैं लेकिन समाज में प्रारंभ से ही चली आ रही पुरुष प्रधान मानसिकता कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा इसी पुरुषवादी मानसिकता का नतीजा है।
पुरुष खुद को महिलाओं पर अपना वर्चस्व मानता है। सो वह उनके साथ इस हिंसा तक चला जाता है कि मानवता भी शर्मसार हो जाए। महिलाएं भी इसके लिए कम जिम्मेदार इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे घरेलू हिंसा को सहती रहती हैं। हालांकि इसकी बड़ी वजह सामाजिक और मानसिक है।
वे मानती हैं यदि वे अपने पति या किसी परिवारीजन की ओर से की जाने वाली घरेलू हिंसा के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगी तो अलग-थलग पड़ जाएंगी। ऐसे में उनको सामाजिक संरक्षण का अभाव दिखता है। जबकि उन्हें मानकर चलना चाहिए कि वे अकेली नहीं हैं। कानून उन्हें पति अथवा उसके सगे-संबंधियों द्वारा निर्दयता के विरूद्ध संरक्षण प्रदान करता है।
इस मामले में, पति अथवा उसके सगे-संबंधियों को तीन वर्ष तक के कारावास और जुर्माने से दंडित किए जाने का प्रावधान है। पाया गया है कि वे महिलाएं अपने पति द्वारा घरेलू और यौन हिंसा की शिकार ज्यादा होती हैं, जो आत्मनिर्भर नहीं होतीं, इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वे खुद को आत्मनिर्भर बनाएं और घरेलू व यौन हिंसा के खिलाफ कानून का सहारा लेने से पीछे नहीं हटें, तभी घरेलू हिंसा जैसी अमानवीय घटनाओं को अंजाम देने वालों को सबक मिल सकेगा।
