मेरा शहर मेरी प्रेरणा : बस एक प्रयास...फिर सरकारी तंत्र की रीढ़ बनेगा 300 बेड अस्पताल
वर्ष 2019 में जब कोविड ने दस्तक दी तो जिले में त्राहि-त्राहि मच गई, उस दौरान शासन के आदेश पर 300 बेड अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाने के निर्देश दिए गए। 300 बेड से सुसज्जित इस अस्पताल में हजारों संक्रमित मरीजों को बेहतर इलाज मिलने से नई जिंदगी मिली लेकिन यहां मरीजों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ नहीं हो सकी है। हालांकि जल्द से जल्द इसका संचालन सुपर स्पेशिलिटी रुप में हो सके इसके लिए जन प्रतिनिधियों के साथ ही प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी शासन तक लगातार पत्राचार कर रहे हैं।
जल्द मिलेगी ट्रामा विंग की सौगात
निजी ही नहीं सरकारी सेवाओं में भी बरेली जिला किसी मायने में पीछे नहीं है, हालांकि सुविधाएं मिलने में भले ही अभी वक्त है बीते वर्षों में जहां मरीज सरकारी सुविधा लेने से कतराते थे. लेकिन अब इन सुविधाओं में भी व्यापक सुधार हो रहा है। जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है लेकिन बहुत जल्द ही ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल स्थित ट्रामा विंग में ही इलाज मिलेगा। इस विंग का निर्माण पूर्ण हो चुका है, यहां शासन स्तर से स्टाफ की तैनाती भी की जा रही है। जल्द ही इसका संचालन भी आरंभ कर दिया जाएगा। संचालन का प्रयास अफसर युद्ध स्तर पर कर रहे हैं। ट्रामा विंग में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के साथ आर्थो और सर्जरी के विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। ऑपरेशन थिएटर, एक्सरे रूम और पैथोलॉजी लैब होगी। छह बेड का आईसीयू होगा। साथ ही दो नर्सिंग स्टेशन और एक रिकार्ड रूम भी बनाया जाएगा।
15 वार्ड, आईसीयू समेत अन्य सुविधा चाक चौबंद
जिला व महिला अस्पताल में अलावा मरीजों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए शासन ने तीन सौ बेड के लिए दिल खोलकर धनराशि खर्च की। मार्च 2013 से इस अस्पताल को बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। करीब 10 साल बाद कोविड काल में इसे कोविड अस्पताल बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने यहां ओपीडी संचालन कराने का आदेश दिया उस दौरान से ही यहां ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीजों को इलाज मिल रहा है लेकिन भर्ती प्रक्रिया आरंभ न होने से गंभीर मरीजों को गैर अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। बस एक प्रयास पुरजोर तरीके से शासन और प्रशासन की ओर से दिया जाए तो ये अस्पताल गंभीर मरीजों को संजीवनी देने में सबसे अहम कड़ी साबित होगा। इतना ही नहीं यहां मरीजों को भर्ती करने के साथ ही बेड, उपकरण, वार्ड समेत अन्य संसाधन भी मौजूद हैं।
