मेरा शहर मेरी प्रेरणा : 23 साल पहले शहर ने सुनी थी बाबा हरदेव सिंह के बुलडोजर की गूंज...रसूख के आगे भी नहीं थमी थी गरज

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Edited By Amrit Vichar
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मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के बुलडोजर बाबा के रूप में प्रसिद्ध होने से करीब 23 साल पहले यूपी सरकार के पीसीएस अफसर हरदेव सिंह बुलडोजर वाला अफसर के नाम से प्रसिद्धि पा चुके हैं। बाद में तो उनके नाम के बाबा शब्द जुड़ गया और वह आज भी बाबा हरदेव सिंह के नाम से ही जाने-पहचाने जाते हैं। बरेली शहर में 30 साल पहले मात्र छह महीने के कार्यकाल में ही उन्होंने नगर निगम जैसी राजनैतिक संस्था को प्रशासनिक संस्था के रूप में बदल दिया था। 

पीसीएस अफसर हरदेव सिंह को 27 सितंबर 1995 को बरेली के नगर आयुक्त पद पर तैनाती मिली थी। यहां पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले नगर निगम कार्यालय के कर्मचारियों पर अंकुश लगाया। उनकी लेटलतीफी, बिना बताये कार्यालय से गायब होने पर अंकुश लगा दिया। इसके बाद उन्होंने सफाई कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू किया। बरेली के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अनुपम मार्कंडेय बताते हैं कि हरदेव सिंह सुबह छह बजे ही सड़कों पर निकल पड़ते थे। सड़कों और नालियों की सफाई को बेहद संजीदगी से चेक करते थे। कई बार तो वह स्वयं नाली में हाथ डालकर चेक करते थे कि सिल्ट पूरी तरह से निकाली गई है या नहीं। सफाई मनमाफिक न मिलने पर दुबारा अपने सामने सफाई कराते थे।

वह कहते हैं कि हरदेव सिंह का असली रूप तो अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दिखा। हरदेव सिंह ने इस शहर को पहली बार बताया कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं। उस दौर में शहर के बड़े-बड़े शूरमाओं के अतिक्रमण देखते-देखते ध्वस्त करा दिए। धीर-धीरे उनके खिलाफ माहौल बनने लगा। रसूख वालों ने हरदेव सिंह से परेशान नगर निगम कर्मचारियों से उनके खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया। सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। नगर निगम के गेट पर मरा हुआ कुत्ता रस्सी से बांध कर लटका दिया गया और कूड़े के ढेर लगा दिए गए। इसके बाद शासन ने 31 मार्च 1996 को उनका तबादला कर दिया।

 

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