Lucknow Crime News: ढाई घंटे तक घर में रहा हत्यारा, सीसी कैमरे में झोला ले जाते दिखा, नीलिमा की बेरहमी से की गई हत्या

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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सर्विलांस की मदद से एक्टिव मोबाइल नंबरों की भी जांच, जानकीपुरम बुजुर्ग नीलिमा श्रीवास्तव हत्याकांड

लखनऊ, अमृत विचार: जानकीपुरम के जानकी विहार स्थित यूनाइटेड सिटी में 70 वर्षीय नीलिमा श्रीवास्तव की हत्या ने आसपास रहने वाले बुजुर्गों के दिल में खौफ भर दिया है। दिनभर मोहल्ले में पड़ोसियों की भीड़ लगी रही। जानकीपुरम पुलिस ने सीसी कैमरों की मदद से जांच शुरू की। फुटेज में स्पष्ट हुआ कि हत्यारा नीलिमा के घर के अंदर करीब 2 घंटे 33 मिनट तक रहा। यह भी दिखा कि नीलिमा ने हत्यारे की दस्तक पर स्वयं दरवाजा खोला, जिसके बाद आरोपी उनके पीछे-पीछे घर में घुसा। मौके का फायदा उठाकर उसने हत्या कर लूटपाट की। वारदात के बाद आरोपी ने दोबारा शॉल ओढ़ी और फरार हो गया। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
एसीपी अलीगंज सैयद अरीब अहमद के अनुसार, नीलिमा के घर की ओर जाने वाले सभी मार्गों के सीसी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। फुटेज में काली शॉल ओढ़े एक व्यक्ति को वसुधा इवेंट लॉन की दिशा से पैदल आते देखा गया। उसने नीलिमा के घर का दरवाजा खटखटाया और प्रवेश के बाद दरवाजा बंद हो गया। रात करीब 2:30 बजे वह मुंह पर मफलर व शॉल ओढ़े बाहर निकला। इधर-उधर देखने के बाद पैदल ही भाग गया। आरोपी के हाथ में एक झोला भी दिखा।

इस फुटेज के बाद पुलिस की दो टीमें आसपास के सभी मार्गों के कैमरों की तलाश में जुटी हैं। सर्विलांस टीम वारदात के समय सक्रिय मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है। कई संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं। पुलिस परिजनों और रिश्तेदारों से बारीक जानकारी इकट्ठा कर रही है।

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समधी के मकान में रहती थीं नीलिमा, बहनें उठाती थीं खर्चा

घटनास्थल पर पुलिस ने मृतका के समधी केपी सक्सेना से जानकारी ली। एनटीपीसी से सेवानिवृत्त केपी सक्सेना ने बताया कि उनकी बेटी नम्रता की शादी वर्ष 2010 में नीलिमा के इकलौते बेटे विभोर से हुई थी। बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ रहती थी, इसलिए उन्होंने बेटी-दामाद को यूनाइटेड सिटी स्थित मकान रहने के लिए दे दिया था। नीलिमा भी वहीं रहती थीं। वर्ष 2018 में विभोर की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद केपी सक्सेना अपनी बेटी और 12 वर्षीय नाती विभु को अपने घर ले आए। नीलिमा मकान में अकेले रह रही थीं। बहनें—रीता, नीरा, अंजली, रागिनी, पूनम—और भाई प्रदीप उनका खर्च उठाते थे। उन्हें हर महीने करीब तीन हजार रुपये भेजते थे और खाने के लिए टिफिन लगवा रखा था। टिफिन देने वाला लड़का रोज दोपहर एक बजे आता था।

साल भर पूर्व नीलिमा से हुई थी टप्पेबाजी

बहन पूनम ने रोते हुए बताया कि करीब एक साल पहले एक कबाड़ी वाला नीलिमा के घर आया था। वह बातों में फंसाकर उनके सोने के कड़े उतरवा ले गया। कई दिन बाद नीलिमा ने इसकी जानकारी दी, लेकिन पुलिस में शिकायत नहीं हुई। पड़ोसी उर्मिला ने भी इसकी पुष्टि की।

टिफिन में रखी मिली एक रोटी

उर्मिला के अनुसार, नीलिमा का टिफिन रोजाना दोपहर करीब एक बजे आता था। टिफिन में पांच रोटियां रहती थीं—दो दोपहर, दो रात में और एक सुबह चाय के साथ खाती थीं। घटना के बाद पुलिस ने किचन में टिफिन में एक रोटी रखी मिली। पड़ोसियों के मुताबिक नीलिमा बहुत मिलनसार थीं। वह रोज दोपहर और शाम को बाहर बैठकर पड़ोसियों से बातचीत करती थीं और अक्सर अपने पोते की बातें साझा करती थीं।

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चिल्लाने पर दबाया मुंह, नीलिमा ने किया था संघर्ष

फॉरेंसिक टीम की जांच में नीलिमा के शरीर और गर्दन पर संघर्ष के निशान मिले। इससे स्पष्ट है कि उन्होंने बदमाश का विरोध किया था। शोर मचाने पर आरोपी ने उनका मुंह दबा दिया। निढाल होने पर गला घोंटकर हत्या की। इसके बाद वह अलमारी की चाभी ढूंढता रहा। रजाई-गद्दे पलटकर ताला तोड़ा और सामान झोले में भरकर भाग निकला।

पड़ोसी बोले, किस पर करें विश्वास

जब पुलिस ने बताया कि फुटेज में संदिग्ध बेफिक्र होकर अंदर जाते और आसानी से बाहर निकलते दिखा है, तो पड़ोसियों ने कहा कि “अगर वह नीलिमा को जानता था, तो अब किस पर विश्वास करें?”

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