स्मार्ट मीटर की अधिक वसूली का होगा बिल में समायोजन, UP विद्युत नियामक आयोग ने जारी की नई कॉस्ट डाटा बुक

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊः उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को नए वर्ष पर बड़ी राहत देते हुए पूरी प्रदेश के लिए नई कॉस्ट डाटा बुक जारी कर दी है। आयोग के निर्देशानुसार प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर अपडेट कर 12 जनवरी से पहले हर हाल में नई कॉस्ट डाटा बुक को लागू करना अनिवार्य होगा।

नव वर्ष के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं की ओर से विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार, सदस्य संजय कुमार सिंह और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा से भेंट कर नई कॉस्ट डाटा बुक जारी करने पर आभार जताते हुए नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब नियामक आयोग ने साफ निर्णय दे दिया है।

आयोग के अनुसार सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 2800 रुपये, थ्री फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अधिकतम कीमत 4100 रुपये से अधिक किसी भी उपभोक्ता से वसूल नहीं की जा सकती।

गौरतलब है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों ने 9 सितंबर 25 को नियामक आयोग की अनुमति के बिना आदेश जारी कर सिंगल फेस मीटर की कीमत 6016 रुपये, थ्री फेस मीटर की कीमत 11341 रुपये वसूलना शुरू कर दिया था। 10 सितंबर- 25 से 1 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश भर में 3,18,740 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर के लिए एस्टीमेट जमा किया, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ता सिंगल फेस मीटर के थे। यदि 6016 रुपये की मनमानी दर से गणना की जाए तो कुल वसूली करीब 191 करोड़ रुपये बैठती है, जबकि आयोग की ओर से तय 2800 रुपये की दर से यह राशि लगभग 89 करोड़ रुपये होती है।

इस प्रकार बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 102 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का समायोजन करना होगा। अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन अब तक इसका पालन नहीं किया जा रहा था।नई कॉस्ट डाटा बुक में यह साफ कर दिया गया है कि पोस्टपेड कनेक्शन पर सिक्योरिटी राशि लेकर उपभोक्ता को पोस्टपेड मोड में रखना पूरी तरह कानूनी है। स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है ।उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड लागू करना विद्युत अधिनियम का उल्लंघन है।

 

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