लखनऊ : मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में आउटसोर्सिंग कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा, भर्ती कर लिए अयोग्य कोर्स कोऑर्डिनेटर
समाज कल्याण मंत्री के निर्देश पर जांच में सामने आया घोटाला, कंपनी और कोऑर्डिनेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
लखनऊ, अमृत विचार : समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। आउटसोर्सिंग ने 48 अयोग्य कोर्स-कोऑर्डिनेटर भर्ती कर लिए और दो वर्षों में उन्हें 6.91 करोड़ रुपये का मानदेय भुगतान कर दिया। शिकायत पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जांच कराई। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया तो मंत्री के निर्देश पर विभाग ने ‘अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ और कोर्डिनेटर्स के खिलाफ गोमतीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत राज्य में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्युदय कोचिंग सेंटर्स संचालित हैं। इन कोचिंग्स में सिविल सेवा समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। कोचिंग सेंटर्स के लिए पिछले दो वर्षों में 69 कोर्स कोऑर्डिनेटर भर्ती किए गए, जिन्हें 60 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय भुगतान किया गया।
पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग के पास एक शिकायत पहुंची कि कोचिंग सेंटर्स के लिए जो कोऑर्डिनेटर रखे गए हैं-वे अयोग्य हैं।
मंत्री असीम अरुण ने शिकायत को गंभीरता से लेकर फौरन जांच बिठा दी। जांच में 48 कोर्स कोऑर्डिनेटर अयोग्य पाए गए है। ये कोऑर्डिनेटर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिये भर्ती हुए थे। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने पर आउटसोर्सिंग कंपनी भी संदेह के घेरे में आ गई, क्योंकि कोऑर्डिनेटरों की भर्ती की उसी के जरिये हुई थी।
जानकारी के मुताबिक, जिला स्तर पर नियुक्त कोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए पात्रता की शर्तों में एक शर्त ये भी है कि वो पीसीएस की मुख्य परीक्षा पास किया होना चाहिए। जांच में फर्जीवाड़ा से विभाग भी सन्न रह गया है, इसीलिए इस मामले में तत्काल कठोर कार्रवाई की गई है।
समाज कल्याण विभाग ने पिछले दो वर्षों में मानदेय के रूप में जो भुगतान किया है। उसकी रिकवरी की भी तैयारी चल रही है। समाज कल्याण विभाग के मुताबिक सभी कोर्स कोआर्डिनेटरों से रिकवरी होगी। इसके अलावा इस प्रकरण में किस-किस स्तर पर मिलीभगत है-ये पता लगाने के लिए आंतरिक जांच भी की जाएगी। इसमें शामिल सभी अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए कथित तौर पर जाली और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए संबंधित अनुबंध कंपनी को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार ठहराया गया है। मंत्री ने दस्तावेज सत्यापन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तथा लापरवाही की प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भविष्य में अनुबंध के आधार पर की जाने वाली सभी नियुक्तियों के लिए पुलिस सत्यापन और दस्तावेज सत्यापन अनिवार्य करने के भी आदेश दिए हैं। अरुण ने कहा कि पारदर्शिता और पात्रता मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में कार्यरत सभी अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया जाएगा।
