सर्दी में छाले व घाव को न करें नजरअंदाज, दुर्लभ पेम्फिगस बीमारी का संकेत, ऐसे करें बचाव...
यह संक्रमण त्वचा की कोशिकाओं को बांधने वाले प्रोटीन पर कर रहे हमला
कानपुर, अमृत विचार। अगर सर्दी के मौसम में आप एक ही कपड़ा कई दिनों तक पहनते हैं तो ऐसे में सचेत होने की सख्त जरूरत है। क्योंकि इसकी वजह से न सिर्फ शरीर में दाने निकल सकते हैं, बल्कि त्वचा में दर्दनाक छाले व घाव तक हो सकते हैं। यह संक्रमण त्वचा की कोशिकाओं को बांधने वाले प्रोटीन पर हमला करने का काम कर रहे हैं। इसलिए सर्दी के मौसम में त्वचा पर दाने व खुजली को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में चर्म रोग विभाग की ओपीडी में नौ मरीज दुर्लभ पेम्फिगस बीमारी से ग्रस्त मिले, जिनमे मुंह, त्वचा, नाक, गले, आंखों और जननांगों पर छाले, खुजली व दर्द की समस्या देखी गई। खुजली करने पर यह समस्या और बढ़ी। कई जगह इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला तो वह हैलट आए।
यहां पर दुर्लभ पेम्फिगस बीमारी की आशंका पर डॉक्टरों ने जांच कराई तो जांच में बीमारी की पुष्टि हुई। चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. देव शिवहरे के मुताबिक दुर्लभ पेम्फिगस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा और श्लेष्मा झिल्लियों (मुंह, नाक, जननांग) पर हमला करती है, जिससे दर्दनाक छाले और घाव हो जाते हैं, जो गंभीर हो सकते हैं। छाले काफी नाजुक होने की वजह से वह आसानी से फट जाते हैं और इस वजह से दर्दनाक घाव बने।
हालांकि दवा, साफ-सफाई व नियमित देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता हैं। इस बीमारी के इलाज में बायोप्सी और खून की जांच करना काफी जरूरी होता है। लापरवाही करने पर इलाज लंबे समय तक करना पड़ता है। बताया कि सर्दी की शुष्क हवा और ठंड त्वचा को और संवेदनशील बना सकती है, जिससे छाले जल्दी फट सकते हैं और घाव बढ़ सकते हैं। सर्दी के कारण शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
ऐसे करें बचाव...
- एलर्जी ग्रस्त लोग सर्दी के मौसम में चर्म रोग विशेषज्ञ से सुझाव व दवाएं लें।
- संक्रमण से बचने के लिए हाथ धोते रहें और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।
- त्वचा की देखभाल के लिए मॉइस्चराइजर का उपयोग करें।
- तनाव कम करें, योग, ध्यान या अन्य तरीकों से तनाव कम करें।
- गर्म कपड़े पहनें, ठंड से बचाव करें, ताकि त्वचा पर सीधे ठंड न लगे।
- संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन नियमित करें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें, गुनगुना पानी जरूर पीएं।
