फैमिली आईडी से फर्जीवाड़े पर फुल स्टॉप: 98 योजनाओं का 15 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधे लाभ, एक परिवार-एक पहचान से खत्म हुई गड़बड़ी
लखनऊ, अमृत विचार: समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से प्रदेश में फैमिली आईडी कार्ड को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जा रही है। फैमिली आईडी के माध्यम से डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर को प्रभावी बनाया गया है, जिससे फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगी है और वास्तविक पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ निर्बाध पहुंच रहा है।
प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार की कुल 98 जनकल्याणकारी योजनाएं अब फैमिली आईडी से जुड़ चुकी हैं। इन योजनाओं का लाभ प्रदेश के 15.07 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिल रहा है। फैमिली आईडी पोर्टल पर अब तक 44 लाख नागरिक आवेदन कर चुके हैं। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत अधिकारी के माध्यम से फैमिली आईडी बनाई जा रही है। एक ही पहचान संख्या से पूरे परिवार का विवरण उपलब्ध होने से योजनाओं का लाभ पारदर्शी, त्वरित और सटीक तरीके से पात्र लोगों तक पहुंच रहा है।
इनसेट
एक परिवार–एक पहचान से योजनाओं का स्वतः चयन
फैमिली आईडी 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या है, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी दर्ज रहती है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप यह व्यवस्था एक परिवार-एक पहचान के सिद्धांत को साकार कर रही है। इससे पात्रता के आधार पर योजनाओं का स्वतः चयन संभव हो रहा है और दोहराव, अपात्रता या गड़बड़ी की संभावनाएं समाप्त हो रही हैं। फैमिली आईडी लागू होने से नागरिकों को आय, जाति, निवास जैसे प्रमाण पत्रों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो परिवार किसी कारणवश राशन कार्ड से वंचित हैं, वे भी फैमिली आईडी के माध्यम से योजनाओं से जुड़ सकें।
इनसेट
आधार आधारित प्रणाली से गरीबों तक सीधी पहुंच
फैमिली आईडी के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार नंबर और मोबाइल से लिंक होना अनिवार्य है, जिससे ओटीपी आधारित सत्यापन किया जा सके। यह व्यवस्था गरीब, श्रमिक, किसान, महिला, बुजुर्ग और दिव्यांग तक सरकारी सहायता की सीधी पहुंच सुनिश्चित कर रही है। अब तक 19 लाख से अधिक फैमिली आईडी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं और यह कार्ड पूरी तरह निःशुल्क है, जिसका खर्च सरकार स्वयं वहन कर रही है। फैमिली आईडी डाटाबेस में अब तक 15.7 करोड़ से अधिक नागरिक पंजीकृत हैं।
