Bareilly : सीएम ग्रिड योजना बनी आफत, सड़क पर हादसों का खतरा बढ़ा
बरेली, अमृत विचार। शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और बरेली को स्मार्ट बनाने का सपना दिखाकर शुरू की गई सीएम ग्रिड योजना अव्यवस्था, खतरे और लापरवाही की पहचान बन चुकी है। डीडीपुरम, एमबी इंटर कॉलेज रोड और स्टेडियम रोड पर चल रहे काम की धीमी रफ्तार ने वाहन चालकों की मुसीबत बढ़ा दी है।
सड़क किनारे पाइप, मिट्टी और मलबे के ढेरों ने सड़क को संकरा और असुरक्षित बना दिया है। पैदल चलने वालों से लेकर दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक सभी जूझ रहे हैं। कोहरे और रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। बरेली में सीएम ग्रिड योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में मॉडल टाउन क्षेत्र में 46 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की गई है, जिसमें सड़क सुधार, जल निकासी और पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जाना है। दूसरे चरण में कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप से जीआरएम, कुदेशिया रोड होते हुए सूद धर्म कांटे तक 35 करोड़ रुपये का काम प्रस्तावित है, जबकि तीसरे चरण में श्यामगंज पुल से ईंट पजाया मार्ग तक निर्माण होना है।
हकीकत यह है कि पहले चरण के कार्य ही लापरवाही से कराए जा रहे हैं। दो माह से अधिक समय बीतने के बावजूद न सड़क दुरुस्त हो पाई और न ही काम की समय सीमा नजर आ रही है। इससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही है। खास बात यह है कि कार्यदायी संस्था को नगर आयुक्त कई बार चेतावनी दे चुके हैं, बावजूद काम में कोई खास तेजी नहीं आई। जनता का धैर्य जवाब देने लगा है। रोजाना जाम, धूल, गड्ढे और हादसों का डर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
सिस्टम की बेरुखी से धूल-गड्ढों में फंसी मरीजों की जिंदगी
डीडीपुरम और स्टेडियम रोड शहर के व्यस्त इलाकों में गिनी जाती है, शहर में दूसरे नंबर पर सबसे अधिक अस्पताल इसी रोड पर है। सिस्टम की बेरुखी ने इस सड़क को अव्यवस्था का अड्डा बना दिया। इसी मार्ग से आने वाले सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदारों को धीमे और बेतरतीब निर्माण कार्य से सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। धूल, गड्ढे और मलबे के कारण एंबुलेंस और निजी वाहन रेंगते नजर आते हैं। सड़क किनारे स्थित प्रतिष्ठानों के संचालक भी उड़ती धूल से त्रस्त हैं। सड़क के दोनों ओर जगह-जगह खुदाई कर दी गई है, जिससे पूरा इलाका अस्त-व्यस्त हो गया है।
क्या कहते हैं लोग
राधिका कपूर ने बताया कि सीएम ग्रिड योजना का नाम लेकर सड़क को महीनों से खोद दिया गया है। न काम की रफ्तार है, न कोई जवाबदेही। अगर यही स्मार्ट सिटी है, तो आम आदमी की मुश्किलें कौन देखेगा।
सुमन वर्मा के मुताबिक रोज गड्ढों और मिट्टी से भरी सड़क पर जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है। रात और कोहरे में हालात और खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन काम करने वाला कोई नजर नहीं आता।
लविश कपूर ने बताया कि धूल ने स्टेडियम रोड के आसपास की दुकानदारी चौपट कर दी है। ग्राहक आने से डरते हैं। करोड़ों खर्च हो रहे हैं, लेकिन हालात बदतर होते जा रहे हैं, यह सीधी लापरवाही है।
डा. आशुतोष अग्रवाल के मुताबिक विकास के नाम पर शहर में कई जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई है। स्टेडियम रोड और डीडीपुरम में तो बुरा हाल है। काम की धीमी रफ्तार हर किसी के लिए मुसीबत बनी है।
