भू-प्रशासन संबंधी प्रक्रियाएं होंगी सरल और पारदर्शी, यूपी में फरवरी 2026 तक पूरा होगा डिजिटल सरलीकरण का लक्ष्य

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Published By Muskan Dixit
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भू-स्वामित्व नामांतरण और लैंड यूज चेंज में डिजिटल पहल

लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर भूमि से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी, तेज और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भू-प्रशासन में लंबे समय से चली आ रही जटिलताओं को दूर करने के लिए अब भू-स्वामित्व नामांतरण (धारा-34) और लैंड यूज चेंज (धारा-80) की प्रक्रियाओं का डिजिटल सरलीकरण किया जा रहा है। यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा विकसित एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के माध्यम से लागू की जाएगी, जिसे फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया गया है।

इस पहल से किसानों, भू-मालिकों, उद्यमियों और निवेशकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने और अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, ऑनलाइन प्रणाली के कारण निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद के संयुक्त प्रयासों से भू-संपत्ति हस्तांतरण के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन किया जा रहा है। अब खसरा-खतौनी विवरण, मालिकाना हक के प्रमाण और अन्य जरूरी दस्तावेज एक ही बार ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे। डिजिटल डेटा फ्लो के जरिए अभिलेखों की स्वतः जांच होगी, जिससे पहले की तरह कई फॉर्म भरने, लेखपाल की आख्या का इंतजार करने और बार-बार आवेदन देने की जरूरत नहीं रहेगी। इससे आम नागरिकों के समय और धन दोनों की बचत होगी।

कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने की प्रक्रिया भी अब डिजिटल होगी। पहले जहां इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनुमोदन और दौड़-भाग करनी पड़ती थी, वहीं अब ऑनलाइन आवेदन के जरिए भूमि की स्थिति, मौजूदा उपयोग और आसपास के क्षेत्र की जानकारी एक ही फॉर्म में ली जाएगी। अनावश्यक औपचारिकताओं को हटाकर डिजिटल जांच व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे लेखपाल की बार-बार रिपोर्टिंग की आवश्यकता समाप्त होगी। विभाग ने आवेदन फॉर्म, आख्या रिपोर्ट और प्रमाणपत्र के सरल प्रारूपों का परीक्षण भी पूरा कर लिया है।

नोटिस और प्रमाणपत्र होंगे ऑनलाइन

अब नामांतरण और लैंड यूज चेंज से जुड़े सभी नोटिस डाक के बजाय ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएंगे। इससे आवेदकों को तुरंत जानकारी मिलेगी। प्रक्रिया पूरी होने पर नामांतरण प्रमाणपत्र और लैंड यूज चेंज सर्टिफिकेट भी कुछ ही दिनों में ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगे। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के साथ एपीआई एकीकरण से डेटा का आदान-प्रदान और अधिक प्रभावी होगा।

विवाद, भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

विशेषज्ञों के अनुसार, इस डिजिटल पहल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि भूमि से जुड़े विवाद, भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, लैंड यूज चेंज प्रक्रिया में आसानी आने से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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