बाराबंकी वेदर : शीतलहर का कहर, जिले में लुढ़का पारा, लोग बेहाल
बाराबंकी, अमृत विचार। पहले से कड़ाके की ठंड का सितम झेल रहे लोगों को शीतलहर ने हिला कर रख दिया। तेज हवाओं ने सर्दी का ऐसा साथ दिया कि धूप निकलने के बावजूद लोग ठिठुरन व गलन से बेहाल रहे। एक ओर भीषण सर्दी का कहर इंसान से लेकर पशु पक्षियों तक है तो दूसरी ओर छुट्टी आगे न बढ़ने से स्कूली बच्चे असमंजस में रहे। सरकार की ओर से घोषित अवकाश की सीमा आज समाप्त हो गई है।
उंगलियां जाम कर देने वाली सर्दी ने अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक शाम होते ही कोहरा बिछ रहा तो सर्द रात ने हाईवे पर सफर की रफ्तार थाम रखी है। ठंड के सितम में इजाफा दो दिन से चल रही शीतलहर ने कर दिया है। ऐसा नहीं कि धूप नहीं निकल रही पर सर्दी के आगे सूर्यदेव भी बेबस दिख रहे, गर्मी की दुपहरी तपने वाले सूर्य की तपिश फिलहाल न के बराबर है।

दिन का अधिकतम तापमान 18 डिग्री और न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा आठ किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली। शीतलहर रूपी पछुआ हवाओं से गलन बढ़ गई है, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शाम होते ही सर्द हवा और गलन के कारण सड़कों पर आवाजाही कम हो जा रही। सोमवार को दिन में बाजार की चहल पहल शाम होते ही कम हो गई।
कल सकट चौथ पर्व को लेकर लोगों ने दिन में ही खरीददारी निपटा ली। उधर कोहरे के चलते ट्रेनों की आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है। ट्रेनें लगातार विलंबित होती जा रहीं, इंतजार कर रहे यात्री दूसरे साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। उधर उप निदेशक कृषि डीके सिंह ने बताया कि मौसम फसल के अनुकूल है। अभी पाला जैसी स्थिति नहीं है लेकिन किसान अगर चाहे तो फसल को पानी दे सकता है, जिससे नमी भी बनी रहेगी वहीं पाला से भी बचाव होगा।
