UP : स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के साथ चेक मीटरों का नहीं हो रहा मिलान, चिंता बढ़ी

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटरों के साथ लगाए गए चेक मीटरों के आंकड़ों का मिलान नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, पावर कॉरपोरेशन ने इस संबंध में अब तक एक भी रिपोर्ट ऊर्जा मंत्रालय को नहीं भेजी है। इससे स्मार्ट मीटरों को लेकर आ रही शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि जब चेक मीटरों की रीडिंग का मिलान ही नहीं किया जा रहा तो उपभोक्ता स्मार्ट मीटरों पर भरोसा कैसे करें। परिषद का कहना है कि यह उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 56.82 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से करीब 37.43 लाख मीटर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं। स्मार्ट मीटरों की रीडिंग की सत्यता जांचने के लिए प्रदेश भर में 3,76,596 चेक मीटर भी लगाए गए हैं, लेकिन इनका उद्देश्य ही पूरा नहीं हो पा रहा है।

भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार, हर माह उपभोक्ताओं के यहां लगे पुराने मीटर (चेक मीटर) और स्मार्ट प्रीपेड मीटर की रीडिंग का मिलान कर उसकी रिपोर्ट ऊर्जा मंत्रालय को भेजना अनिवार्य है। बावजूद इसके पावर कॉरपोरेशन की ओर से अब तक एक भी मासिक रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।

परिषद का कहना है कि यदि समय रहते चेक मीटरों का मिलान और रिपोर्टिंग नहीं की गई तो स्मार्ट मीटरों को लेकर अविश्वास और शिकायतें और बढ़ेंगी। परिषद ने मांग की है कि तुरंत मिलान रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल हो सके और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

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