इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप के सदस्यों की कुंडली खंगाल रही एजेंसियां,खंगाली जा रही रमीज की एक साल की ट्रैवल हिस्ट्री और तीन मोबाइल का डिलीट डेटा रिकवर
लखनऊ, अमृत विचार: केजीएमयू की जूनियर रेजिडेंट से यौन शोषण, गर्भपात और मतांतरण कांड में जेल जाने वाले डॉक्टर रमीजउद्दीन केस में जांच एजेंसियां भी जुट गयी हैं। आगरा में बने इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप से जुड़े लोगों का ब्योरा एजेंसियां जुटा रही है। इसके साथ ही आरोपी डॉ. रमीज को सह देने वाले कई विभागों के डॉक्टर और फैकेल्टी पुलिस और जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में हैं। जांच एजेंसी अब विभागाध्यक्षों और स्टाॅफ से पूछताछ की तैयारी में हैं।
शुरुआती पड़ताल में जानकारी मिली है कि इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप से जुड़े कई लोग वर्तमान में अलग-अलग जिलों में सफेदपोश पदों पर तैनात हैं। इन सभी की गतिविधियां रमीज की कार्यप्रणाली से काफी हद तक मेल खाती बताई जा रही हैं। सूत्रों की माने तो ग्रुप से जुड़े लोग एक साथ करीब चार युवतियों के संपर्क में रहते हैं। रमीज के पकड़े जाने के बाद से ही ग्रुप से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से दूरी बनाए हुए हैं।
वहीं, पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान रमीजुद्दीन के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। हालांकि, इन तीनों मोबाइल फोन का डाटा रमीज ने पूरी तरह से डिलीट कर दिया था। फारेंसिक विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल का डिलीट डाटा रिकवर कराने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही आरोपी रमीज की बीते एक वर्ष की ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रमीज पिछले एक साल में कहां गया और किससे मिला? रमीज जहां-जहां भी रुका या रहा, वहां की स्थानीय पुलिस से संपर्क कर पूछताछ की जा रही है।
पैथालॉजी और सीसीयू के कई इंचार्जों के इंचार्ज से की थी शिकायत
रेजिडेंट डॉक्टर रमीज पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला डॉक्टर ने आयोग की पूछताछ में बड़े खुलासे किए थे। बताया था कि डॉक्टर रमीज की हरकतों और प्रताड़ना के बारे में पैथालॉजी और सीसीयू विभाग के अधिकारियों से उसने शिकायत की थी। इसके बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की थी। पीड़िता से यह जानकारी मिलने पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने भी केजीएमयू के विभागध्यक्षों और इंचार्जों की भूमिका पर सवाल उठाया था।
आगरा में जूनियर के हॉस्टल में रहकर चलाता था नेटवर्क
चौक पुलिस ने आगरा पुलिस से बात की तो पता चला कि डॉक्टर रमीज जब वर्ष 2012 में आगरा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा था। उस समय वह अपने हॉस्टल में न रहकर जूनियर के साथ रहता था। मुस्लिम जूनियरों के साथ रहकर पूरा नेटवर्क चलाता था। उन्हें हिंदू महिला डॉक्टरों से प्रेम प्रसंग चलाने के लिए उकसाता था। जूनियर मुस्लिम डॉक्टरों को इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप से उसने जोड़ लिया था। ग्रुप की बैठक कर सारी रणनीति तैयार करते थे। बताया जा रहा है कि यहीं से रमीज दिल्ली विस्फोट की सूत्रधार डॉ. शाहीन के भाई परवेज के संपर्क में आया था। परवेज उस समय आगरा मेडिकल कॉलेज से ही एमडी कर रहा था।
