Bareilly: इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में 600 छात्रों की दी गईं डिग्री
बरेली, अमृत विचार। इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के 12वें दीक्षांत समारोह में डॉक्टरेट की मानद उपाधि लेने के बाद पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में अच्छा-बुरा कुछ नहीं हैं। अच्छे-बुरे केवल हमारे विचार हैं, इसलिए अपनी सोच को ऊंची रखें। हंस और बगुला मानसरोवर में एक साथ रहते हैं। हंस मोती चुनता है और बगुला मछलियां। दोनों की सोच में कितना अंतर है। सोच ऊंची आदमी शहंशाहों का शाह, सोच नीची आदमी भिखारी ठनठन पाल मदन गोपाल।
इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी में शनिवार को 12 वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए स्नातक, परास्नातक और शोधार्थी छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. उमेश गौतम और प्रति कुलाधिपति पार्थ गौतम रहे। समारोह में बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा, मिस यूनिवर्स रह चुकीं अभिनेत्री सुष्मिता सेन, पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू और तापस दास को अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉक्टरेट उपाधि मिलने पर सभी के चेहरे खिल गए। विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में 600 छात्र-छात्राओं को अपने-अपने कोर्सों में उत्तीर्ण होने पर डिग्री प्रदान की गई।
इसमें 36 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 35 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल, 19 विद्यार्थियों को ब्रांज मेडल दिए गए। वहीं 23 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई। पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि एक अखबार के एक लेख ने मेरे जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। अखबार के पहले पेज पर नवजोत सिंह द स्टॉक लेस वंडर नाम से लेख छपा था। इसे शॉट मारना ही नहीं आता है।
इसके बाद मैंने रोज प्रैक्ट्रिस करते एक दिन में 125 छक्के मारता था। हाथों से खून निकलने लगता था। धीरे-धीरे हाथ लोहे के हो गए। दर्द महसूस ही नहीं होता था और फिर चार साल बाद भारतीय टीम की अंतिम-14 में चयन हुआ। टीम में चयन होने के बाद लगातार पांच अर्धशतक लगाये जो रिकार्ड है। इसके बाद उसी अखबार में फिर पहले पेज पर लेख छपा जिसमें लिखा था कि नवजोत सिंह सिद्धू द स्टॉक लेस वंडर फॉर्म पाम प्रूव हिटर, यह सब तपस्या के कारण हुआ। जीवन में अगर हमें कुछ हासिल करना है, तो तपस्या करनी ही पड़ेगी।
प्रति कुलाधिपति पार्थ गौतम ने कहा कि माता-पिता के दिए संस्कारों पर चलने वाले युवा ही भारत को विश्व गुरु बनाएंगे। उन्होंने इन्वर्टिस का एलुमिनाई हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. उमेश गौतम ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वह जिस पद पर रहें, उसके साथ न्याय करें। काम में अनुशासन होना बहुत जरूरी है। अगर इतिहास लिखना है तो जोश और जुनून हमेशा बनाए रखें।
दीक्षांत समारोह के बाद मेधावियों ने विश्वविद्यालय प्रांगण में लगे डीजे पर नृत्य का भी आनंद लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के संरक्षक केके गौतम, कार्यकारी अध्यक्ष सोनल गौतम, कुलपति प्रोफेसर वाईडीएस आर्या, कुलसचिव संतोष कुमार, डीन इंजीनियरिंग एवं एजुकेशन प्रो. आरके शुक्ला, डीन मैनेजमेंट प्रो. मनीष गुप्ता, पत्रकारिता विभाग के डीन डॉ. राजेश कुमार शर्मा, डीन लॉ प्रो. रीना जायसवाल, डीन मानविकी एवं व्यवहारिक विज्ञान प्रो. पीपी सिंह, कृषि विभाग डीन डॉ. एसएस त्रिपाठी, फार्मेसी के प्राचार्य प्रो. नीलांचल त्रिवेदी, डीन इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रो. राजू वोलाटी, चीफ प्रॉक्टर अमृतांश मिश्रा एवं सीएसईडी निदेशक तल्हा खान, सुधीर मेहरोत्रा, एडवोकेट लवलेश पाठक सहित अन्य उपस्थित रहे।
मकसद मायने रखता है, संघर्ष कोई याद नहीं रखता
राष्ट्रीय नाट्य अकादमी से प्रशिक्षित अभिनेता संजय मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरेट की उपाधि मिलने पर वह बहुत अभिभूत हैं। उन्होंने डिग्री धारकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारा मकसद मायने रखता है, रास्ते में आने वाले संघर्ष को कोई याद नहीं रखता।
सीखा वो फार्मूले, अब इस्तेमाल करने का समय : सुष्मिता
बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने कहा कि पढ़ाई करते हुए हमने जो भी फार्मूले सीखे हैं, अब उन्हें इस्तेमाल करने का समय है। मैंने जो भी सीखा है, वो जिंदगी से सीखा है। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आप जैसा सोचते हैं, जिंदगी वैसे नहीं चलती। जीवन को पढ़ते रहना जरूरी है। इस मौके पर वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी तापस दास ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।
