वैक्सीन की होड़
कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है। इस बीच वैक्सीन को लेकर लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में टीकाकरण शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि भारत में भी जल्द वैक्सीन को मंजूरी मिल सकती है। सरकार की ओर से इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके …
कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है। इस बीच वैक्सीन को लेकर लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में टीकाकरण शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि भारत में भी जल्द वैक्सीन को मंजूरी मिल सकती है। सरकार की ओर से इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके बीच दिल्ली की एक कंसंल्टेंसी फर्म लोकल सर्किल की ओर से कराए गए सर्वे में पाया गया है कि देश में कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों के अंदर अभी हिचक है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 69 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वैक्सीन की जरूरत नहीं है। सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों का मानना है कि वे हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहे हैं।
भारत में वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है, इसके परिणाम कैसे होंगे? यह बाद में पता चलेगा, लेकिन यह स्थितियां चौंकाने वाली हैं कि वैक्सीन के परीक्षण में शामिल हुए हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री पहली खुराक के बाद कोरोना संक्रमित हो गए। सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) के कोविड-शील्ड वैक्सीन परीक्षण के खिलाफ कंपनी को कानूनी नोटिस भेजने वाले चैन्नई के वालंटियर ने आरोप लगाया था कि उन्हें उस टीके की पहली खुराक लेने के बाद तंत्रिका संबंधी गंभीर परेशानी हो गई।
हालांकि कंपनी ने वॉलंटियर के आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण और गलत’ बताया है लेकिन इन आरोपों और वास्तविकता के बीच संशय तो पैदा हो ही गया है, जिसका जवाब जरूरी है। बहरहाल, जिस तरह से वैक्सीन जल्द लाने और उसकी मंजूरी के लिए कंपनियां जुटी हुई हैं उससे लगता है कोरोना वैक्सीन को लेकर असाधारण रूप से जल्दबाजी मचाई जा रही है। यह जल्दबाजी फार्मा कंपनियों की आपसी प्रतिद्वंद्विता का परिणाम कही जा रही है।
दरअसल, सरकार के स्तर से अपनी पीठ थपथपाने के लिए भी कोरोना वैक्सीन को आपातकाल मंजूरी दी जा रही है, जबकि अभी तक परीक्षणों के तीसरे चरण के पूरे परिणाम भी सामने नहीं आए हैं। बड़ी बात यह है कि देश में सीरम इंस्टीट्यूट की कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल मात्र 1600 व्यक्तियों पर ही किये जा रहे हैं जबकि तीसरे चरण में कम से कम 30 से 40 हजार वालंटियर पर परीक्षण किया जाता है। उसके बाद परिणामों की पूरी समीक्षा की जाती है फिर कहीं अनुमति मिलती है।
ऐसे में यह चिंताजनक है कि कंपनी ने एक ओर तीसरे चरण के पूरे परिणामों के आए बगैर आपातकाल प्रयोग की अनुमति मांगी, दूसरी ओर सीरम के सीईओ अदार पूनावाला कह रहे हैं कि यदि वैक्सीन के कोई घातक साइड इफेक्ट सामने आते हैं तो उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं होंगे। ऐसे में, उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकारों की ओर से यह बात पूरी तरह सुनिश्चित कर ली जाएगी कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरकारी होगी।
