मुरादाबाद: 10 लाख का घोटाला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल के बाद टीम लखनऊ वापस लौटी
मुरादाबाद,अमृत विचार। लखनऊ एजेंसी से चार अधिकारियों ने जिले में डेरा डाला तो स्वास्थ्य अधिकारियों की सांसें अटक गई थीं। ये अधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) स्कीम जननी सुरक्षा योजना में हुए लगभग दस लाख के घपले की परत खोलने में जुटी रही। इस योजना में कांठ, ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे सीएचसी के अधिकारियों की बड़ी …
मुरादाबाद,अमृत विचार। लखनऊ एजेंसी से चार अधिकारियों ने जिले में डेरा डाला तो स्वास्थ्य अधिकारियों की सांसें अटक गई थीं। ये अधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) स्कीम जननी सुरक्षा योजना में हुए लगभग दस लाख के घपले की परत खोलने में जुटी रही। इस योजना में कांठ, ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे सीएचसी के अधिकारियों की बड़ी चूक और लापरवाही सामने आई थी। जिस प्रक्रिया के तहत लाभार्थी को आर्थिक लाभ दिया जाना था, उन्होंने उसका पालन नहीं किया और मनमर्जी कर नियमों को ताक पर रख लिया।
शनिवार को आई चार सदस्यीय टीम ने रविवार को भी जांच की और फिर सोमवार को जांच पूरी करने के बाद लखनऊ लौट गई। दो साल पुराने इस मामले में पिछले साल ही ऑडिट टीम ने शासन को इस घपले की रिपोर्ट सौंपी थी। पर इस मामले में तीनों ही सीएचसी के अधिकारी सहित आठ लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस टीम ने भी इस मामले की जांच की है, उसकी रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों पर तलवार लटक सकती है।
शासन ने एनएचएम स्कीम पर हुए खर्च, खर्च की प्रक्रिया और जो बजट मिला उसे पूरा खर्च किया गया या नहीं, इसकी जांच के लिए चार सदस्यों को मुरादाबाद भेजा है।
टीम ने मुख्यालय के अलावा ब्लॉक स्तर पर भी जांच की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार 26 जुलाई 2018 को इस घपले की सुगबुगाहट हुई थी, 21 जून वर्ष 2019 को जिला अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी की रिपोर्ट में भी यह घपला सही पाया गया था। कांकरेंट आडिटर मैसर्स शर्मा उत्तम एंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट में भी इस घपले को पकड़ा था। जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) में नौ लाख 92 हजार 886 रुपये का गबन पाया गया था। सीएचसी कांठ, मूंढापांडे, ठाकुरद्वारा के अधिकारी सहित आठ लोगों के नाम सामने आए थे। जिला कार्यक्रम अधिकारी रघुवीर सिंह ने बताया कि यह टीम शनिवार को आई थी। ब्लाक स्तर पर सीएचसी भी पहुंची।
इन लोगों ने इतनी रकम खाते में की ट्रांसफर
पदनाम राशि
चिकित्सा अधीक्षक, कांठ 4,72,918
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, कांठ 79,718
ब्लॉक लेखा प्रबंधक कांठ 20,999
चिकित्सा प्रभारी, मूंढापांडे 67,605
फार्मासिस्ट, मूंढापांडे 83,504
वार्ड ब्वाय, मूंढापांडे 1,29,400
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, ठाकुरद्वारा 1,25,942
ब्लॉक लेखा प्रबंधक, ठाकुरद्वारा 12,800
कई नियमों को रखा था ताक पर
जांच में रिपोर्ट के अनुसार इसमें कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। भुगतान टुकड़ों में होने से टेंडर के प्रावधानों का उल्लंघन किया। टीडीएस के प्रावधानों की अवहेलना भी सामने आई हैं। जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को प्रसव के लगभग दो वर्ष के बाद भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी पाया गया कि लाभार्थी को नौ महीने तक इस तरह के लाभ दिए जाने की जानकारी देने के लिए अस्पताल और आशा कार्यकत्री के पास काफी वक्त होता है। उसे इस समय में यह जानकारी महिलाओं को दे देनी चाहिए। पर इसमें इस पर कोताही बरती गई है।
लखनऊ से चार सदस्यीय ऑडिट टीम आई है। एनएचएम स्कीम पर हुए कार्यों को जांच रही है। जांच के बाद रिपोर्ट शासन को देगी। यह रूटीन आडिट है। इसमें सभी स्कीमों की बजट व प्रक्रिया जांची जाती है। -डा. मिलिंद चंद गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
