संपादकीय: नव निवेश से आशा

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Published By Monis Khan
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे में लगभग 6,650 करोड़ रुपये का निवेश और बीस हजार लोगों के लिए संभावित रोजगार का आश्वासन मिला है, इन आंकड़ों में अभी और बढोतरी संभव है। सिंगापुर के नेतृत्व, निवेशकों और टेमसेक होल्डिंग जैसे संस्थानों से संवाद का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक पूंजी के लिए विश्वसनीय गंतव्य के रूप में स्थापित करना है और यह उद्देश्य पूरा होता दिखता है। 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के प्रयास बहुत तेज हुए हैं। 

2018 और 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लाखों करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए। प्रवासी भारतीय सम्मेलनों और रोड शो के जरिए आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी अवसंरचना में निवेश आकर्षित हुआ है। नोएडा–ग्रेटर नोएडा डेटा सेंटर हब, झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़, चित्रकूट को मिलाकर डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और पूर्वांचल–बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे इसके उदाहरण हैं। आधिकारिक दावों के अनुसार, 2023 समिट में 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव आए, पिछले वर्षों में प्रतिवर्ष औसतन कई हजार करोड़ का वास्तविक निवेश खासकर एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग में अवश्य आया है, परंतु सचाई है कि निवेश प्रस्ताव और वास्तविक पूंजी प्रवाह में अंतर रहता है। अनुभव यह बताता है कि सभी प्रस्ताव जमीन पर नहीं उतरते। 

आम तौर पर 30 से 50 प्रतिशत परियोजनाएं ही निर्धारित समय में साकार होती हैं। पिछले दस वर्षों में एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट विस्तार, डेटा सेंटर निवेश और डिफेंस कॉरिडोर और इससे औद्योगिक आधार बाहरी निवेश के चलते ही मजबूत हुआ है। अपराध-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में सुधार के दावों ने सूबे में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। आगे यदि सिंगापुर जैसे निवेशक दीर्घकालिक पूंजी लगाते हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू-एडिशन, निर्यात और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। सिंगापुर की ताकत शहरी नियोजन, वित्तीय सेवाओं, पत्तन-अवसंरचना, स्मार्ट सिटी और ग्रीन एनर्जी में है। 

यदि आवास, मेट्रो, इंडस्ट्रियल पार्क, फिनटेक और सौर-ऊर्जा परियोजनाओं में बेहतर निवेश आया, तो प्रदेश की उत्पादकता और शहरी जीवन-गुणवत्ता दोनों बढ़ेगी। उदाहरण के लिए वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन में पूंजी आने से कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को बेहतर मूल्य मिल सकता है, तो फिनटेक और एसएमई फंडिंग से सूक्ष्म उद्यमों को गति मिल सकती है। बाहरी निवेश निस्संदेह उद्योगों में वृद्धि करेगा बशर्ते स्थानीय एमएसएमई को आपूर्ति शृंखला में विधिवत जोड़ा जाए। बाहरी पूंजी केवल बड़े शहरों तक सीमित रही तो क्षेत्रीय असमानता बढ़ सकती है, इसलिए नीति का फोकस क्लस्टर-आधारित विकास, स्किल अपग्रेडेशन और स्थानीय उद्यमिता पर होना चाहिए। अवसंरचना, आवास, वित्तीय सेवाओं और ग्रीन एनर्जी के अलावा हेल्थटेक, एजुकेशन टेक, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, खाद्य-प्रसंस्करण और रक्षा विनिर्माण जैसे कुछ क्षेत्र भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं। सिंगापुर की विशेषज्ञता से शहरी प्रशासन और ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में सुधार आएगा।