मथुरा में उमड़ा हजारों का सैलाब: दाऊजी के आंगन में बरसा गोपी-प्रेम, जानिए बलदेव के ऐतिहासिक हुरंगा की खासियत
मथुरा। ब्रज की होली के विविध रंगों में सबसे अनूठा और रौद्र-प्रेम का प्रतीक 'दाऊजी का हुरंगा' गुरुवार को बलदेव कस्बे में पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया गया। भगवान बलराम (दाऊजी महाराज) के आंगन में आयोजित इस 'कपड़ा फाड़ होली' को देखने के लिए देश-विदेशी के हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
'हुरंगा' के दौरान समूचा मंदिर परिसर अबीर-गुलाल के बादलों और भक्ति के उल्लास में सराबोर नजर आया। बलदेव के इस ऐतिहासिक हुरंगा की खासियत यह है कि यहाँ महिलाएं (गोपियां) और पुरुष (हुरियारे) एक-दूसरे के साथ पारंपरिक तरीके से होली खेलते हैं।
हंसी-ठिठोली और समाज गायन के बीच जैसे ही हुरंगा शुरू हुआ, हुरियारों ने गोपियों पर बाल्टियों भरकर रंग डालना शुरू किया। इसके जवाब में गोपियों ने हुरियारों के कुर्ते और कपड़े फाड़कर उनके 'कोड़े' (पोतना) बनाए और उन्हें रंग में भिगोकर हुरियारों पर बरसाना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे हुरंगा परवान चढ़ा, मंदिर के चौक में रंगों का तालाब बन गया। हुरियारे अपने फटे हुए कपड़ों को हवा में लहराते हुए 'बलदाऊ जी महाराज की जय' के नारे लगा रहे थे।
मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और दाऊजी महाराज ने अपनी गोपियों के साथ इसी प्रकार होली खेली थी, जिसे आज भी परंपरा के रूप में जीवित रखा गया है। हजारों की भीड़ और विदेशी पर्यटकों की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई।
मंदिर के सेवायतों और स्थानीय ब्रजवासियों ने आने वाले मेहमानों का स्वागत किया। हुरंगा देखने आए पर्यटकों के लिए यह दृश्य कौतूहल और रोमांच से भरा था। जहाँ एक ओर मार पड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर चेहरों पर अद्भुत मुस्कान और भक्ति का भाव था। शाम तक चलने वाले इस आयोजन के बाद सभी ने दाऊजी महाराज की विशेष आरती में भाग लिया।
