समाधान का कदम
नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन को लगभग एक माह होने जा रहा है लेकिन अब तक कोई बात नहीं बनी है। हालांकि इस आंदोलन के 28 वें दिन बुधवार को सरकार की ओर से एक बार फिर बातचीत के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इस …
नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन को लगभग एक माह होने जा रहा है लेकिन अब तक कोई बात नहीं बनी है। हालांकि इस आंदोलन के 28 वें दिन बुधवार को सरकार की ओर से एक बार फिर बातचीत के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इस पर किसानों की ओर से भी सकारात्मक कदम बढ़ाया गया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने पांच सदस्यीय कमेटी बना दी है। किसान नेताओं की यह कमेटी तय करेगी कि सरकार के बातचीत के प्रस्ताव पर क्या रूपरेखा तय की जाएगी। यह कमेटी सरकार के प्रस्ताव को लेकर एक ड्राफ्ट भी तैयार करेगी। इस बीच गाजीपुर बॉर्डर पर डटे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी कहा कि कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध बातचीत से ही सुलझेगा। अगर सरकार चाहती है तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं।
किसानों की ओर से वार्ता के लिए विचार करने की सहमति इस आंदोलन की कड़ी में समाधान की ओर सकारात्क कदम माना जा सकता है। असल में, अभी तक आंदोलनरत किसान सरकार से वार्ता के लिए ही तैयार नहीं हो रहे थे। वह शुरू से सिर्फ एक ही मांग पर अड़े हैं कि कृषि बिल निरस्त किए जाएं।
सरकार भी इस पर कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है। नतीजतन, आंदोलन खिंचते-खिंचते एक महीना हाेने जा रहा है। सरकार की ओर से तो बातचीत के प्रस्ताव पूर्व में भी भेेजे गए लेकिन किसान सिर्फ कानून वापसी पर ही अड़े हुए हैं। सरकार कहती आ रही है कि वह कानून में यथा संशोधन के लिए राजी है। किसान वार्ता करें और सुझाव दें लेकिन किसान नेता कहते आ रहे हैं कि हम कानून में संशोधन नहीं केवल वापसी चाहते हैं। इस मांग के इतर वार्ता के किसी भी औचित्य को वह नकार रहे हैं।
कोई दोराय नहीं कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद से ही है। इस आंदोलन में भी जब तक किसान और सरकार के बीच वार्ता नहीं होती, तब तक कोई समाधान निकलने से रहा। यह भी सच है कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक आंदोलन के सबब आम जनता को दिक्कतें झेलनी होंगी।
सरकार और किसानों, दोनों को ही यह सोचना होगा कि आंदोलन का खमियाजा जनता को महीने भर से भुगतना पड़ रहा है। दिल्ली और उसके आसपास मंडियां बंद पड़ी हैं। यातायात भी बाधित हो रहा है। आंदोलन कर रहे किसानों को भी दिक्कतें हैं। ऐसी स्थिति में उनकी ओर से सरकार से वार्ता का निर्णय इस आंदोलन और मुद्दे के समाधान की दिशा में सराहनीय कदम है।
