कानपुर में बेटिंग एप गिरोह का भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार... 26 मोबाइल फोन व 54 एटीएम कार्ड समेत अन्य सामान बरामद
कानपुर। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग एप के माध्यम से लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 26 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 54 एटीएम कार्ड, 26 पासबुक, एक चेकबुक, 30 मोबाइल सिम तथा अन्य सामान बरामद किया है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त प्रतिबंधित गेमिंग ऐप/वेबसाइट के माध्यम से लोगों को लालच देकर ठगी करते थे तथा फर्जी खातों के जरिए धनराशि को ट्रांसफर कर ठिकाने लगाते थे। जांच में अभियुक्तों के खातों में विगत तीन महीने में भारी ट्रांजेक्शन पाया गया है तथा लगभग 50 लाख रुपये की धनराशि फ्रीज कराने की कार्यवाही प्रचलित है।
उन्होने बताया कि साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत डीसीपी दक्षिण, एडीसीपी दक्षिण और एसीपी नौबस्ता के पर्यवेक्षण में बर्रा पुलिस टीम साइबर अपराधों पर नजर रख रही थी। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने प्राचीन शिव मंदिर बरा-6 के पास छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में अन्य चार आरोपियों को अंडरपास के पास से दबोचा गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सत्यम तिवारी, अनमोल विश्वकर्मा, नितिन गुप्ता, अभिषेक वर्मा, हितेश निगम, स्नेहल बजाज, सुल्तान अहमद और नौशाद के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी प्रतिबंधित गेमिंग एप और वेबसाइट जैसे लोटस365, रेड्डी बुक, कार्तिकेय तथा दुबई ईएक्सएच के जरिए लोगों को फंसाते थे।
पहले छोटी रकम जिताकर भरोसा जीतते थे, फिर बड़ी रकम लगवाकर हारने पर मजबूर कर देते थे। ठगी की रकम फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। पुलिस के मुताबिक गिरोह डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि को भी ऑनलाइन गेमिंग के जरिए खपाता था। आरोपियों के मोबाइल फोन में बड़ी संख्या में संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन का विवरण मिला है।
प्रारंभिक जांच में करीब 50 लाख रुपये की धनराशि चिन्हित हुई है, जिसे फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में थाना बरा में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को न्यायालय भेजा जा रहा है। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और गिरोह के नेटवर्क की जांच में जुटी है।
