Moradabad: मंडी सुधार को आए 11 करोड़ पांच माह से डंप, आढ़तियों के विवाद से रुका  विकास 

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। करीब 46 वर्ष पूर्व सन् 1980 में स्थापित स्थानीय मंडी आज बदहाल स्थिति से जूझ रही है। मंडी के विकास और आधुनिकीकरण के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत करीब 11 करोड़ रुपये की धनराशि पिछले पांच महीनों से निष्क्रिय पड़ी हुई है।

मंडी में नई दुकानों, सड़कों और प्रकाश व्यवस्था को सुधारने के लिए यह बजट जारी किया गया था। इसमें बी क्लास की 14 दुकानों के निर्माण के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये तथा सी क्लास की 72 दुकानों के निर्माण के लिए करीब पांच करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि, मंडी के आढ़तियों द्वारा प्रस्तावित निर्माण कार्यों का विरोध किए जाने के चलते मंडी प्रशासन ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। 

विरोध के कारण विकास योजनाएं ठप पड़ गई हैं और स्वीकृत धनराशि उपयोग में नहीं लाई जा सकी है। स्थानीय व्यापारियों और किसानों का कहना है कि मंडी की खराब सड़कों, जर्जर दुकानों और अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सुधार कार्यों में हो रही देरी चिंता का विषय बनी हुई है।अब सवाल यह है कि जब विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग ही नहीं हो पा रहा, तो मंडी की बदहाल स्थिति में सुधार कब और कैसे होगा।

मंडी सचिव नवीन फल सब्जी मंडी संजीव कुमार ने बताया कि पहले आढ़ती मंडी में बनी दुकानों की खस्ता हालत को सुधारने के कई प्रदर्शन तक कर चुके हैं। काफी प्रयास के बाद सरकार ने मंडी के सौंदर्यीकरण के लिए इस बार बड़ी धनराशि आवंटित की है तो अब कुछ आढ़ती इसका विरोध कर रहे हैं। निर्माण की धनराशि अभी वापस नहीं की गई है। यदि आढ़तियों की आपसी सहमति बनती है तो निर्माण कराया जाएगा।

 

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