कैंपस का पहला दिन: दोस्ती और नए सपनों की शुरुआत
कैम्पस में पहला दिन मेरे जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक रहा। स्कूल से निकलकर कॉलेज में कदम रखना एक नए संसार में प्रवेश करने जैसा था। मन में उत्साह के साथ हल्की-सी झिझक भी थी, लेकिन ज्यादा डर नहीं लगा क्योंकि मेरे दो चचेरे भाई भी उसी कॉलेज में मेरे साथ एडमिशन लिए थे। हम तीनों का साथ होना मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा था।
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पहले दिन हम तीनों साथ ही कॉलेज पहुंचे। नए कपड़े पहनकर, हाथ में रिस्ट वॉच, आंखों पर धूप का चश्मा और पैरों में महंगे जूते पहनकर हम खुद को किसी हीरो से कम नहीं समझ रहे थे। क्लास में जाकर हमने एक साथ बैठना तय किया। उस दिन पढ़ाई से ज्यादा ध्यान नए माहौल को समझने और नए दोस्तों को देखने में था।
इंटर तक हम ब्वॉयज स्कूल में पढ़े थे, इसलिए कॉलेज में लड़कियों के साथ पढ़ना हमारे लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उनके सामने बात करने में झिझक होती थी और अंदर ही अंदर एक अलग-सा रोमांच भी महसूस होता था। कई बार हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते और फिर नजरें झुका लेते। यह सब बहुत नया और मजेदार था।
धीरे-धीरे हमारा रूटीन बन गया। हम साथ में क्लास अटेंड करते, साथ में लंच करते और कभी-कभी क्लास बंक भी कर लेते थे। कॉलेज की कैटीन हमारी सबसे पसंदीदा जगह बन गई थी। वहां बैठकर घंटों हंसी-मजाक करना, चाय-समोसे खाना और दोस्तों के साथ समय बिताना हमें बहुत अच्छा लगता था। सुबह कॉलेज जाने की तैयारी भी खास होती थी। हम अच्छे से तैयार होकर जाते ताकि सबके सामने अच्छा प्रभाव पड़े, खासकर लड़कियों के सामने थोड़ा स्टाइल मारने का अलग ही मजा था।
कुल मिलाकर, कॉलेज का पहला दिन सिर्फ एक शुरुआत नहीं था, बल्कि दोस्ती, मस्ती और नए अनुभवों की एक खूबसूरत कहानी की शुरुआत था, जिसे याद करके आज भी चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। धीरे-धीरे हम कॉलेज के माहौल में पूरी तरह घुलने-मिलने लगे। नए दोस्तों का दायरा बढ़ता गया और हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था।
प्रोफेसर्स का पढ़ाने का अंदाज भी स्कूल से काफी अलग था, जो शुरुआत में थोड़ा अजीब लगा, लेकिन बाद में वही सबसे रोचक लगने लगा। खाली पीरियड में कैंपस में घूमना, लाइब्रेरी में समय बिताना और फेस्टिवल्स की तैयारी करना हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। हर दिन के साथ हमारा आत्मविश्वास बढ़ता गया और कॉलेज जीवन की यह नई दुनिया हमें और भी आकर्षित करने लगी।
