बहराइच : बाल विवाह कराने वालों को दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान
बहराइच। बहराइच जिला प्रशासन ने अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बाल विवाह कराने वालों को दो वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। जिला प्रोबेशन अधिकारी मो. खालिद ने बुधवार को बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की बालिका तथा 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह कराना पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह में शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि कानून के तहत बाल विवाह करने वाले वयस्क पुरुष, विवाह का अनुष्ठान कराने वाले पुरोहित, मौलवी अथवा अन्य व्यक्तियों को दो वर्ष तक के कठोर कारावास, एक लाख रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
मोहम्मद खालिद ने कहा कि बाल विवाह केवल कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक कुरीति भी है, जिसके शारीरिक और मानसिक रूप से दूरगामी दुष्प्रभाव होते हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, के अवसर पर कई स्थानों पर बाल विवाह कराने की परंपरा रही है।
इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है। ऐसे में प्रशासन ने इस अवधि में विशेष सतर्कता बरतने और संदिग्ध मामलों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने प्रिंटिंग प्रेस संचालकों, टेंट व्यवसायियों, मैरिज हॉल संचालकों, बैंड-बाजा, कैटरिंग, फोटोग्राफी और विवाह संस्कार कराने वाले पुरोहितों एवं मौलवियों से अपील की है कि वे विवाह आयोजन से पहले वर-वधू की आयु का सत्यापन अवश्य कर लें।
उन्होंने कहा कि यदि वधू की आयु 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष से कम है तो ऐसे आयोजन से दूरी बनाएं और प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल पुलिस हेल्पलाइन 112, महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला पावर लाइन 1090 या स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचना दें, ताकि समय रहते बाल विवाह को रोका जा सके।
