लधुकथा : मां का इंतजार... हर ट्रेन में खोजता रहा अबोध बालक, मगर मां अब इस दुनिया में नहीं
लखनऊः कल किसी रिश्तेदार को छोड़ने रेलवे स्टेशन जाना हुआ। वहां कुछ बच्चे आपस में लड़-झगड़ रहे थे। तभी रेलवे पुलिस ने डांटते हुए हुए उन बच्चों को वहां से भगाना शुरू कर दिया- “चलो, चलो… सब यहां से भागो।”
बाकी बच्चे तो डरकर भाग गए, मगर एक दुबला-पतला मासूम बालक वहीं प्लेटफॉर्म के कोने में बैठा रहा। पुलिस वाले ने उसे भी डांटकर भगाना चाहा, पर वह भोली आंखों से उनकी ओर देखकर बोला- “मैं नहीं जाऊंगा… मैं अपनी मां का इंतजार कर रहा हूं।” पुलिस वाले ने हैरानी से पूछा, “कहां है तुम्हारी मां?” बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया- “बाबूजी ने कहा है कि मां गांव गई है, ट्रेन से वापस आएगी। मैं रोज यहां उसे लेने आता हूं।” उसकी बातें सुनकर आसपास खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं। वह अबोध बालक, जिसने बचपन से अपनी मां का चेहरा तक नहीं देखा था, आज भी उसी उम्मीद में स्टेशन पर बैठा था। उसे क्या पता था कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है। दुनियादारी, झूठ और मजबूरियों से अनजान वह मासूम, हर आती-जाती ट्रेन में अपनी मां को खोज रहा था।
