आरबीआई के सुझाव पर योगी सरकार का बड़ा वित्तीय फैसला, बाजार ऋण अब समय से पहले चुकाने की मंजूरी मिली

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: विकास कार्यों के लिए वित्तीय संस्थाओं से लिए गए कर्ज के बढ़ते ब्याज बोझ को कम करने के लिए योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य सरकार तय अवधि पूरी होने से पहले भी बाजार ऋण की पूरी धनराशि वापस कर सकेगी। इससे ब्याज भुगतान पर होने वाले बड़े खर्च में कमी आएगी। इस संबंध में वित्त विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई।

अब तक व्यवस्था यह थी कि सरकार ऋण की निर्धारित अवधि पूरी होने तक ब्याज का भुगतान करती थी और अवधि समाप्त होने पर मूलधन वापस किया जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार आवश्यकतानुसार पहले ही ऋण का भुगतान कर सकेगी। वित्त विभाग ने जुलाई 2007 में राज्य सरकार की प्रतिभूतियों से संबंधित जारी जनरल नोटिफिकेशन में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा था। यह संशोधन भारतीय रिजर्व बैंक के सुझावों के आधार पर तैयार किए गए हैं। संशोधन में वित्तीय संस्थाओं से लिए जाने वाले बाजार ऋण जारी करने की प्रक्रिया, ब्याज दर निर्धारण, ब्याज अदायगी और मूलधन भुगतान संबंधी प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इस निर्णय से राज्य सरकार को दीर्घकालिक रूप से ब्याज भुगतान के बड़े बोझ से राहत मिलने की संभावना है। चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सरकार ने ऋणों के ब्याज भुगतान पर 68,921.02 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है।

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