खबर का असर: बेलरायां CLF घोटाले की खुलेगी हर परत ! जागा NRLM विभाग, बनेगी जांच कमेटी
विकासखंड निघासन के बेलरायां क्लस्टर में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) विभाग में हड़कंप मच गया है।
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। विकासखंड निघासन के बेलरायां क्लस्टर में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले के उजागर होने के बाद अब विभागीय अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए हैं। डीसी एनआरएलएम ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए जांच कमेटी गठित कर जांच कराने का फैसला लिया है। इसे लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी गई है।
विभाग की कार्यशैली पर सवाल
बेलरायां क्लस्टर में लंबे समय से नियमों की अनदेखी कर कार्य किए जा रहे थे। सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) में पदाधिकारियों का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित होने के बावजूद वर्षों तक बदलाव नहीं किया गया। एजीएम बैठकें समय पर नहीं कराई गईं और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे। अब करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हुई तो केवल सीएलएफ की पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि वे अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं जिन्होंने वर्षों तक अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।
तीन करोड़ से ज्यादा का गबन
सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर विभागीय निगरानी के बावजूद लंबे समय तक एक ही समूह और पदाधिकारी क्लस्टर पर कैसे कब्जा जमाए रहे। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जाती हैं। समूहों को बैंक से ऋण, सामुदायिक निवेश निधि समेत कई मदों में धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। आरोप है कि इसी धनराशि के संचालन में भारी गड़बड़ी हुई और रिकॉर्ड तथा लेनदेन में भी कई स्तरों पर फर्जीवाड़ा कर करीब तीन करोड़ से अधिक रुपये का गबन कर लिया गया।
अभिलेखों की होगी जांच
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जांच समिति गठित होने के बाद बैंक खातों, भुगतान रजिस्टर, बैठक अभिलेख, प्रस्ताव पुस्तिका और समूहों को जारी धनराशि की विस्तार से जांच की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि किन अधिकारियों की निगरानी में क्लस्टर संचालित हो रहा था और समय-समय पर ऑडिट या निरीक्षण क्यों नहीं कराया गया। इधर घोटाले में फंसी सीएलएफ की पदाधिकारी अब अपने बचाव में सक्रिय हो गई हैं।
शिकायते सुनते तो नहीं होता गबन
सूत्रों का दावा है कि कार्रवाई की आहट के बाद वह विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के यहां लगातार संपर्क साध रही हैं। वहीं दूसरी ओर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी कई महिलाएं खुलकर सामने आने लगी हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो मामला करोड़ों रुपये तक नहीं पहुंचता। अब लोगों की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि अगर जांच ईमानदारी से हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और लंबे समय से चल रही अनियमितताओं का पर्दाफाश हो सकेगा।
जानिए क्या कह रहे हैं अधिकारी
डीसी एनआरएलएम जितेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि काफी गंभीर प्रकरण हैं। कमेटी गठित की जा रही है, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी। जांच में दोषी मिलने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी और सरकारी धन की वसूली भी कराई जाएगी।
