जॉब का पहला दिन

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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यूनियन बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में मेरी पहली नियुक्ति आजमगढ़ जिले में हुई थी। नौकरी का पहला दिन आज भी मेरी स्मृतियों में बिल्कुल ताजा है। उस सुबह मन में उत्साह, घबराहट और नए माहौल को लेकर अनेक सवाल एक साथ उमड़ रहे थे। बैंक की इमारत के बाहर लगा यूनियन बैंक का बोर्ड देखकर पहली बार यह एहसास हुआ कि अब छात्र जीवन पीछे छूट चुका है और जिम्मेदारियों से भरे एक नए सफर की शुरुआत हो चुकी है।

सुबह समय से पहले ही मैं शाखा पहुंच गया। शाखा प्रबंधक ने मुस्कुराकर स्वागत किया और बाकी कर्मचारियों से परिचय कराया। सभी के व्यवहार में अपनापन था, जिससे मेरी झिझक काफी हद तक कम हो गई। बैंक का वातावरण मेरे लिए बिल्कुल नया था- कहीं ग्राहक पासबुक अपडेट करा रहे थे, कहीं नकदी जमा हो रही थी और कहीं ऋ ण से संबंधित बातचीत चल रही थी। हर टेबल पर व्यस्तता साफ दिखाई दे रही थी।

पहले दिन मुझे खातों की जानकारी, नकदी प्रबंधन और बैंकिंग प्रक्रिया को समझने का काम दिया गया। कंप्यूटर स्क्रीन पर लगातार बदलते आंकड़े और ग्राहकों की लंबी कतार देखकर शुरू में थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन वरिष्ठ कर्मचारियों ने धैर्यपूर्वक हर बात समझाई। एक बुजुर्ग ग्राहक जब अपना काम पूरा होने पर मुस्कुराते हुए “धन्यवाद बेटा” कहकर गए, तो भीतर एक अलग ही आत्मविश्वास जागा। उस क्षण महसूस हुआ कि बैंक की नौकरी केवल लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के विश्वास और जरूरतों से भी जुड़ी हुई है।

दोपहर के भोजन के समय सहकर्मियों के साथ बातचीत में स्थानीय संस्कृति, भाषा और लोगों के स्वभाव के बारे में जानने का अवसर मिला। आजमगढ़ की सादगी और आत्मीयता ने पहले ही दिन मन जीत लिया। दिनभर नई चीजें सीखते-समझते समय कब बीत गया,पता ही नहीं चला। शाम को जब शाखा बंद हुई और मैं बाहर निकला, तब मन में एक अलग संतोष था। पहला दिन केवल नौकरी की शुरुआत नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता, जिम्मेदारी और जीवन के नए अनुभवों की ओर बढ़ाया गया पहला मजबूत कदम था। आज भी वह दिन याद आता है, तो चेहरे पर अनायास मुस्कान आ जाती है।

मनीष कटियार, लखनऊ