कानपुर में बोले शंकराचार्य- छिपाई जा रही गौशालाओं की हकीकत, गायों की हालत खराब

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने रविवार को कानपुर में गौ संरक्षण के मुद्दे पर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी दस्तावेजों और बयानों में गौ माता के लिए काफी काम होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। शंकराचार्य ने कहा कि प्रदेश सरकार में गौ सेवा से जुड़े मंत्री धर्मपाल सिंह के वक्तव्य सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में एक गौ आश्रय स्थल के निरीक्षण के दौरान उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया और आश्रय स्थल का दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था ठीक होती तो उसे दिखाने में किसी को संकोच नहीं होता। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा के लिए चल रही उनकी यात्रा के दौरान उन्हें चुप कराने के कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन गौ माता की दुर्दशा देखकर वे मौन नहीं रह सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गौ माता के लिए आवाज उठाना इस देश में पाप कैसे हो गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से न तो विरोध है और न ही समर्थन, बल्कि उनका उद्देश्य केवल गौ संरक्षण और गौवंश की रक्षा के लिए समाज को जागरूक करना है। इस दौरान पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी के बिना टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं कहा था कि लड़ाई बदले के लिए नहीं, बल्कि बदलाव के लिए है। यदि उनकी बात का पालन नहीं किया जा रहा है तो यह उचित नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संदेश का सम्मान होना चाहिए। कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा नेताओं के चार्टर्ड विमान के इस्तेमाल पर उठाए गए सवाल का समर्थन करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि जब आम लोगों से पर्यावरण संरक्षण के नाम पर स्कूटर और कार का कम उपयोग करने की अपील की जाती है तो नेताओं को भी बड़े-बड़े चार्टर्ड विमानों के उपयोग पर विचार करना चाहिए। जनता और नेताओं के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए।

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