Ram Mandir Donation Controversy:टैक्सी ड्राइवर को कहां से मिला कुबेर का खजाना! बन गया कई होटलों लग्जरी गाड़ियों का मालिक
मंदिर के अंदर आने जाने पर भी नहीं थी रोक, नहीं चेक होती थी उसकी गाड़ियां
कुछ वर्ष पूर्व अयोध्या में छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाला एक टैक्सी ड्राइवर को कहां से कुबेर का खजाना मिल गया कि दो तीन वर्षों में उसकी हैसियत ही नहीं बल्कि सूरत भी बदल गई। लग्जरी गाड़ियां, महंगे आईफोन, आलीशान मकान उसकी पहचान बन गई है।
अयोध्या, अमृत विचार। कुछ वर्ष पूर्व अयोध्या में छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाला एक टैक्सी ड्राइवर को कहां से कुबेर का खजाना मिल गया कि दो तीन वर्षों में उसकी हैसियत ही नहीं बल्कि सूरत भी बदल गई। लग्जरी गाड़ियां, महंगे आईफोन, आलीशान मकान उसकी पहचान बन गई है। आज वह कई होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट का मालिक या पार्टनर है।
उसे राम मंदिर आने जाने पर भी किसी तरह की रोक-टोक नहीं थी, यहां तक उसकी गाड़ियों को चेक करने की हिम्मत भी किसी में नहीं थी। यह व्यक्ति राम मंदिर निर्माण से जुड़े एक बड़े शख्स का करीबी बताया जा रहा है। एक समय राम मंदिर आंदोलन के प्रचेता स्व. रामचंद्र परमहंस दास व अशोक सिंघल से उसकी नजदीकियां भी जग जाहिर है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों के श्रद्धा व भक्ति से भरे दान पात्र से कथित गबन का मामला सुर्खियों में आने के बाद उसकी चर्चा भी खूब हो रही है।
अरोपों का केंद्र यह टैक्सी ड्राइवर भी
लग रहे आरोपों का केंद्र यह टैक्सी ड्राइवर भी है। भक्तों के दान पात्रों की गिनती और रखरखाव से जुड़े कामों में उसकी अनौपचारिक पहुंच भी बताई जा रही है। वह सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है। इसमें उसके रसूख के साथ एकत्र की गई अकूट संपत्तियों पर भी अंगुली उठ रही है। लोग हैरान हैं कि उसे कहां से खजाना मिल गया। यहीं नहीं कुछ लोग उसके पक्ष में भी खड़े दिख रहे हैं, वह उसे सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्ता भी बता रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस व ट्रस्ट द्वारा गोपनीय तरीके से की जांच में उसे किस नजर से देखा जाएगा।
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के दान पात्रों में रोजाना जमा होते लाखों रुपये
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के दान पात्रों में रोजाना लाखों रुपये जमा होते हैं। गिनती के दौरान बैंक कर्मियों और अन्य स्टाफ की मौजूदगी में काम होता है, लेकिन कथित गबन के आरोप सामने आए हैं। कुछ कर्मचारियों से पूछताछ हुई, रिकवरी भी बताई गई। राजनीतिक गलियारों में अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने इस पर सवाल उठाए। ट्रस्ट ने ऑडिट की बात कही है, लेकिन सवाल बरकरार हैं।
