Barabanki News : बाराबंकी के याकूती आम की देश-विदेश में बढ़ी मांग, मसौली के बागों से दुनिया तक पहुंचा अनोखा स्वाद

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Published By Deepak Mishra
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मसौली/बाराबंकी, अमृत विचार। जनपद जहां एक ओर पिपरमिंट की खेती के लिए प्रसिद्ध है, वहीं यहां के आम के बाग भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उगाई जाने वाली आम की दुर्लभ और स्वादिष्ट किस्मों में याकूती आम का विशेष स्थान है, जिसकी खुशबू और अनोखा स्वाद इसे देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहचान दिला चुका है।

मसौली के बड़ागांव, भयारा, टेरासानी, रहरामऊ, बिंदौरा, रोटीगांव, गुरेला, नेवला और करसंडा क्षेत्र मैंगो बेल्ट के रूप में जाने जाते हैं। मसौली क्षेत्र के बागों में उत्पादित आमों की मांग विदेशों तक रहती है। आम उत्पादन के यह महीने किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि उनकी अधिकांश आमदनी इसी मौसम पर निर्भर करती है। बड़ागांव निवासी बागवान महबूब उर रहमान किदवई के अनुसार याकूती आम की उत्पत्ति कई दशक पहले उनके पूर्वजों द्वारा बशीर बाग में लीची के पेड़ पर विशेष कलम बांधकर की गई थी।

वर्तमान में बड़ागांव क्षेत्र में इसके करीब 125 पेड़ मौजूद हैं और इसकी नई पौध तैयार कर विस्तार किया जा रहा है। बताया गया कि लगभग 12 वर्ष पूर्व प्रसिद्ध आम उत्पादक कलीम उल्ला खान भी इसकी कलम लेकर गए थे। भयारा निवासी अलीम किदवई और सईद अहमद किदवई के अनुसार याकूती आम का रस पतला होता है तथा इसमें मिठास के साथ हल्का खट्टापन भी रहता है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है। इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

क्या बोले आम विक्रेता तौफीक आलम...

बसवाड़ी बाग के आम विक्रेता तौफीक आलम ने बताया कि उनके बाग में हुस्नआरा, गुलाब खास, जरदालु, खुशबू, गोला, सुर्खा, राड़ी, आम्रपाली, मलका, दशहरी, राठवल, बम्बइया, जौहरी, सफेदा, चौसा, फजरी, लंगड़ा और तैमूरिया सहित कई किस्में मौजूद हैं, लेकिन ग्राहकों की पहली पसंद याकूती आम ही रहता है। स्वाद, सुगंध और विशिष्ट पहचान के कारण यह आम बाराबंकी की शान बन चुका है और इसकी लोकप्रियता देश-विदेश तक पहुंच रही है।

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