विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर परिचर्चा: स्मैक, चरस जैसे जानलेवा नशों का गेटवे है तम्बाकू का सेवन

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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हल्द्वानी, अमृत विचार। हर साल 31 मई को वर्ड नो टोबैको डे (विश्व तम्बाकू निषेध दिवस) मनाया जाता है...यानी तंबाकू को न और स्वस्थ व खुशहाल जीवन को हां। इसी मूलमंत्र के साथ दैनिक अमृत विचार हल्द्वानी कार्यालय में तंबाकू के दुष्प्रभावों से सचेत करने के उद्देश्य से परिचर्चा आयोजित की गई। सेहत और संस्कार विषयक इस परिचर्चा में जिला खेल विभाग, उच्च शिक्षा, मनोविज्ञान और पुलिस विभाग से आए विशेषज्ञों ने खासी संख्या में उपस्थित स्कूली बच्चों एवं युवा खिलाड़ियों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के प्रति जागरुक किया और साथ ही देश निर्माण में नशा मुक्त जीवन की महत्ता समझायी। साथ ही संस्कारों को अपनाकर स्वस्थ रहने को प्रेरित किया।

परिचर्चा से पूर्व कार्यक्रम संयोजक अजय दयाल ने सभी आगंतुकों का परिचय कराया और कार्यक्रम की रूपरेखा को साझा की। अमृत विचार के स्थानीय संपादक अमित शर्मा ने सभी आगुंतकों को पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित मेहमानों के अलावा आए बच्चों को धन्यवाद दिया गया। साथ ही सभी लोगों को मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत ने नशे से दूर रहने की शपथ भी दिलाई।

बच्चों ने भी अपनी बातों को विशेषज्ञों से खुलकर साझा कीं, अपने मन की बातें रखीं, जिनका मौके पर ही समाधान करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में खेल विभाग के क्रिकेट कोच त्रिलोक झीना के अलावा अमृत विचार टीम से अंकुर शर्मा, सर्वेश तिवारी, नरेन्द्र देव सिंह, पवन सिंह नेगी, विनयशील, समय राज, गौरव भारद्वाज, सुरजीत सोलंकी, मनोज आदि का सहयोग रहा।

नशा तस्कर बच्चों को कर रहे टारगेट: डॉ. युवराज पंत
पहले वक्ता के रूप में डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल के मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत ने कहा कि जहां तक तंबाकू की बात है तो इसे हम बड़े नशे जैसे स्मैक, चरस, शराब, डोडा आदि का गेटवे बुलाते हैं। तंबाकू आसानी से बहुत ही कम रूपयों में उपलब्ध होता है। पहले बच्चे इसकी चपेट में आते हैं और फिर बड़े नशे के दलदल में फंस जाते हैं। यहीं नहीं, नशा तस्कर भी बच्चों को टार्गेट कर रहे हैं और उनको अपना शिकार बना रहे हैं। इसलिए तंबाकू को न कहें। साथ ही ऐसे लोग जो इसका सेवन करते हैं उनको भी ऐसा नहीं करने के लिए कहें।

नशे से दूर रहने से ही देश का विकास: डॉ. निर्मला पंत
जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. निर्मला पंत ने कहा कि देश के विकास में आज खेलों का बहुत बड़ा योगदान है। सरकार खेलों के विकास में बहुत ध्यान दे रही है। अच्छा और सफल खिलाड़ी बनने के लिए पहली शर्त ही यह है कि खिलाड़ी नशे से दूर रहे। खेल एक ऐसा विभाग है जिसमें एक दिन की मेहनत से कुछ नहीं होता है। आप एक दिन पढ़कर पास हो सकते हैं लेकिन एक दिन प्रैक्टिस करके खिलाड़ी नहीं बन सकते हैं। इसलिए बच्चों आपको तंबाकू जैसे नशे से दूर रहना है। देश का विकास करना है और केवल खेल, पढ़ाई पर ध्यान देना है, जिससे अच्छा नागरिक बन सकें।

ऊर्जा का सही इस्तेमाल करें युवा: प्रो. जोशी
उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गोपाल दत्त जोशी ने भी अपने विचार साझा किये। कहा कि बच्चों, किशोर और युवाओं के पास ऊर्जा का भंडार है। राष्ट्र निर्माण अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल करें। आज के बच्चों पर ही देश का भविष्य निर्भर करता है। कभी जीवन में स्वयं को असफल न समझें। राष्ट्रपति अब्दुल कलाम पायलट बनने की परीक्षा में असफल हुए थे और बाद में महान मिसाइल वैज्ञानिक से लेकर राष्ट्रपति तक बने। और यह सब तभी होगा जब आपका जीवन नशे से दूर होगा। तंबाकू बहुत ही आसानी से मिलने वाला नशा है और हमें इससे दूर रहना है।

नशाखोरी की सूचनाएं पुलिस से करें साझा: विजय मेहता
कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि दुश्मन देश हमारी युवा पीढ़ी को नशे से खोखला करना चाहते हैं। इसलिए वह भारी मात्रा में नशे में इस्तेमाल होने वाले सामान को हमारे देश में भेजते हैं। उनकी चाल है कि अगर भारत के युवा नशे की चपेट में रहेंगे तो वह अच्छे वैज्ञानिक, खिलाड़ी, सैनिक, इंजीनियर, डॉक्टर नहीं बन पाएंगे। जिससे हमारा देश कमजोर होगा। इसलिए पुलिस लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है। उन्होंने कहा, अगर कोई युवा या किशोर नशे की चपेट में मिलता है उसकी काउंसलिंग कराई जाती है। उसकी मदद की जाती है और हमें यह बताने में बेहद खुशी हो रही है कि कई युवा नशे की चपेट से बाहर आए हैं। कहा कि आप सब पुलिस के नाक, कान, आंख बनें और कहीं भी नशाखोरी की कोई सूचना हो तो पुलिस को बताएं।

 एसटीएच मनोविज्ञानी -डॉ. युवराज पंत ने बताया कि 25 वर्ष की आयु तक हम इतने परिपक्व नहीं होते कि अपना अच्छा और बुरा समझ पाएं। ज्यादातर मामलों में इसी उम्र से ही हम नशे के जाल में फंसते हैं।

 

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