विश्व साइकिल दिवस : कहां करें साइकिलिंग? साइकिल ट्रैक पर आमजन व पुलिस का कब्जा  

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
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शुभम निगम उन्नाव, अमृत विचार। जहां एक ओर आज पूरा देश 'विश्व साइकिल दिवस' मनाकर पर्यावरण संरक्षण, सेहत व फिटनेस के दावे कर रहा है। वहीं उन्नाव में जमीनी हकीकत इसके उलट है। जिला मुख्यालय से शुक्लागंज तक बने मुख्य मार्ग पर करोड़ों से बनाया गया साइकिल ट्रैक आज जन प्रतिनिधियों व प्रशासनिक उपेक्षा के अलावा अफसरों की अनदेखी के कारण पूरी तरह से बदहाल हो चुका है।

बता दें कि इस साइकिल ट्रैक को सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया था। इसका उद्देश्य था कि साइकिल चालकों को सुरक्षित राह मिले और पर्यावरण को बढ़ावा दिया जा सके। लेकिन सरकार बदलने व अफसरों की उदासीनता के चलते यह ट्रैक अब साइकिल चालकों के बजाय स्थानीय दुकानदारों व अवैध कब्जाधारियों की भेंट चढ़ चुका है। करीब 10 किलोमीटर के इस ट्रैक पर अब साइकिल ढूंढने से भी नहीं मिलती। मार्ग किनारे स्थित दुकानदारों ने ट्रैक पर सामान फैला रखा है। जिससे ट्रैक पूरी तरह ब्लॉक हो चुका है। जहां साइकिलें दौड़नी चाहिए वहां अब दिनभर चौपहिया व दोपहिया वाहनों की अवैध रूप से पार्क हो रही है। लंबे समय से मरम्मत न होने से ट्रैक जगह-जगह उखड़ चुका है और इस पर गंदगी, झाड़ियां व मलबे का अंबार है। विश्व साइकिल दिवस पर समाजसेवी डॉ. प्रभात सिन्हा का कहना है कि एक ओर तो सरकार प्रदूषण मुक्त भारत का नारा देती है वहीं दूसरी ओर करोड़ों की सरकारी संपत्ति अफसरों व जन प्रतिनिधियों की नाक के नीचे कबाड़ हो रही है। 

महानगरों जैसा अहसास कराने वाली लाइटें अब बदहाल
उन्नाव-शुक्लागंज फोरलेन पर साइकिल ट्रैक निर्माण के साथ लगाई गईं सैकड़ों एलईडी लाइटें विभागीय अनदेखी के कारण बदहाली के आंसू बहा रही हैं। शुरू में रात के समय इन लाइटों की चकाचौंध से स्थानीय लोगों को महानगर जैसा अहसास होता था। लेकिन देखरेख न होने से अब यह परियोजना दम तोड़ चुकी है। वर्तमान में अधिकतक कीमती लाइटें टूटकर गिर चुकी हैं और जो बची हैं वे शोपीस बनकर रह गई हैं। नागरिकों ने प्रशासन से बंद लाइटों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।

आमजन के साथ साइकिल ट्रैक पर पुलिस का कब्जा 
उन्नाव-शुक्लागंज फोरलेन पर बना यह साइकिल ट्रैक अब हादसों को न्योता दे रहा है। आमजन के साथ-साथ मगरवारा पुलिस चौकी के ठीक बाहर पुलिस ने ही इस ट्रैक पर कब्जा कर रखा है। यहां हादसों में क्षतिग्रस्त व बिना कागजात के जब्त किए गए वाहनों को ट्रैक पर ही डंप कर दिया गया है। ट्रैक बाधित होने से साइकिल सवार व राहगीर फोरलेन पर चलने को मजबूर हैं। इससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

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