लोकायन : इस मंदिर में जमीन के नीचे रहते भगवान
हमारा देश विविधताओं का देश है। हर क्षेत्र में अलग-अलग परंपराएं और धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। कन्नौज में एक अनूठा मंदिर है, जहां भगवान को करीब पांच फीट नीचे जमीन में स्थापित करके रखा जाता है। तीन साल में भगवान एक बार लोगों को दर्शन देते हैं। पूजा अर्चना के बाद मूर्ति को पुन: मिट्टी में दबा दिया जाता है।
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नगर पालिका क्षेत्र के डहलेपुर बांगर में स्थित राजा वासुकी का मंदिर का मंदिर शहर से लगभग आठ किमी की दूरी पर है। शहर के छिपट्टी से और आगे सड़क पर चलते हुए अमराइयों के बीच से यहां तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि जब आप यहां पहुंचेंगे, तो परिसर में मंदिर जैसा कुछ नजर नहीं आएगा। सिर्फ चार पिलर खड़े दिखेंगे। दरअसल, मंदिर का फिर से निर्माण यहां के पुजारी विश्राम द्वारा कराया जा रहा है।
जर्जर मंदिर करीब दो महीने पहले ढहाया जा चुका है। खास बात यह कि यहां विराजने वाले राजा वासुकी की प्रतिमा को अस्थायी रूप से परिसर में ही मिट्टी से दबाकर ईंटों आदि से ढक दिया गया है। इस स्थान के ऊपर कुछ विभिन्न आकार वाले पत्थर पड़े हैं। यहां जमीन के नीचे ढककर रखी गई मूर्ति को हर तीसरे वर्ष भादों महीने की पंचमी को निकाला जाता है। इस दौरान यहां बड़ा मेला लगता है। वासुकी भगवान को काली नदी में स्नान कराने के बाद शृंगार कर जनता के दर्शन के लिए रखा जाता है। दो दिन दर्शन देने के बाद मूर्ति को यथावत जमीन के अंदर स्थापित कर दिया जाता है।
कौन हैं राजा वासुकी
गांव के लोगों का कहना है कि राजा वासुकी पाताल के राजा हैं और इसी कारण इनको जमीन के भीतर रखा जाता है। हर तीसरे साल निकाले जाने और वापस उसी प्रकार रखे जाने की मान्यता के बारे में लोगों को स्पष्ट कोई जानकारी नहीं है, वह सिर्फ इतना कहते हैं कि ऐसा होता चला आ रहा है। यह परंपरा वर्षों से चलती आई है, लेकिन कब से यह पता नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वासुकी की प्रतिमा करीब साढ़े तीन फीट ऊंची है। इनके शीश पर शेषनाग के कई फनों की छाया है। साथ ही आसपास दो अन्य देवता और विराजमान हैं।
