Delhi Malviya Nagar Fire : 21 मौतों का जिम्मेदार कौन? सुरक्षा मानकों में अनदेखी और बड़ी लापरवाही का शिकार हुआ सिस्टम 

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित लेमन होटल-रेंस्तरा में लगी भीषण आग में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है और कई विदेशी नागरिकों सहित 37 लोगों को बचा लिया गया।

लापरवाही का शिकार हुई 21 जिंदगियां 

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अधिकारियों ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि होटल में अग्नि एवं भवन सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गयी है। 

बड़ी संख्या में ठहरे थे अफ्रीकी नागरिक 

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मृतकों में अधिकांश अफ्रीकी नागरिक हैं, जो घटना के समय होटल में ठहरे हुए थे। सूत्रों के अनुसार होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति थी, लेकिन वहां कथित तौर पर करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे और लगभग 40 लोग ठहरे हुए थे।

संकरी गांलिया और पर्याप्त आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव

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अधिकारियों के मुताबिक होटल में संकरी खिड़कियां, पर्याप्त आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव तथा एक ही प्रवेश-निकास द्वार होने की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इन कमियों के कारण आग लगने के दौरान लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई हुई। दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाकर होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला। 

जान बचाने के लिए फंसे हुए लोगों ने खिड़कियों से लगाई छलांग 

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग भी लगाई। यह मामला साकेत थाना क्षेत्र का है और आग लगने के कारणों के साथ-साथ होटल प्रबंधन की संभावित लापरवाही की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं। 

प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

इस बीच, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, साकेत ने बुधवार को चिकित्सा बुलेटिन जारी कर बताया कि कुल 39 घायलों और प्रभावित लोगों को अस्पताल लाया गया था। इनमें 18 को मृत अवस्था में लाया गया। 

आग के धुएं और गंभीर झुलसने की चोटें 

अस्पताल के अनुसार सभी मरीजों का तत्काल चिकित्सकीय परीक्षण किया गया और बहु-विषयक चिकित्सा टीमों द्वारा उपचार शुरू किया गया। पीड़ितों में धुएं से दम घुटने, विभिन्न स्तर की झुलसने की चोटें तथा हादसे के दौरान लगी अन्य चोटें पायी गयीं। अस्पताल में भर्ती 15 मरीजों का उपचार गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में चल रहा है। इनमें से आठ मरीज वेंटिलेटर पर हैं और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। 

बड़े हादसों के लिए अस्पतालों में आपात व्यवस्था प्रोटोकॉल लागू  

पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गयी, जबकि गंभीर रूप से झुलसे एक मरीज को विशेष उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है। अस्पताल ने बताया कि मृतकों में भारतीय और विदेशी दोनों नागरिक शामिल हैं। घटना के बाद अस्पताल ने बड़े हादसों के लिए निर्धारित आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू करते हुए सभी उपलब्ध चिकित्सकीय और सहयोगी संसाधनों को सक्रिय कर दिया है। 

बड़े कारण जिनकी वजह से 21 जाने चली गई 

-नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में भी कमरों का संचालन

-इमारत इतनी घनी और संकरी थी कि आग लगने के बाद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला

-दिल्ली सरकार की ओर से 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' पॉलिसी के तहत केवल 6 कमरे चलाने का लाइसेंस, लालच में मालिक ने अवैध रूप से 25 कमरे बना दिए

-बेसमेंट का भी व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।

-बहुमंजिला होटल-रेस्टोरेंट के पास दमकल विभाग से अनिवार्य माना जाने वाला फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं था।

-इमारत इतनी घनी और संकरी थी कि आग लगने के बाद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला।

-आग लगने के बाद रेस्क्यू टीम को पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

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