खोज : ऐसे हुआ ग्रामोफोन का आविष्कार
आज संगीत सुनना बेहद आसान है, लेकिन एक समय ऐसा था जब किसी गायक की आवाज़ को रिकॉर्ड करके दोबारा सुन पाना असंभव माना जाता था। इस असंभव कार्य को संभव बनाने का श्रेय महान अमेरिकी आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन को जाता है। उन्होंने 1877 में फोनोग्राफ (Phonograph) का आविष्कार किया, जो ध्वनि को रिकॉर्ड और पुनः सुनाने वाला पहला सफल उपकरण था।
हालांकि आधुनिक ग्रामोफोन का विकास बाद में हुआ। वर्ष 1887 में जर्मन मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक एमिल बर्लिनर ने ग्रामोफ़ोन का आविष्कार किया। उन्होंने एडिसन के फोनोग्राफ में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। फोनोग्राफ में ध्वनि को बेलनाकार (Cylinder) सतह पर रिकॉर्ड किया जाता था, जबकि बर्लिनर ने सपाट गोल डिस्क (Record) का उपयोग किया। यही तकनीक आगे चलकर रिकॉर्ड प्लेयर और आधुनिक संगीत उद्योग की नींव बनी।
ग्रामोफ़ोन का कार्य सिद्धांत काफी रोचक था। जब कोई व्यक्ति एक बड़े हॉर्न (भोंपू जैसी संरचना) में बोलता या गाता था, तो उसकी आवाज़ से उत्पन्न ध्वनि तरंगें एक पतली झिल्ली को कंपन कराती थीं। यह कंपन एक सुई तक पहुँचता था, जो घूमती हुई डिस्क पर बारीक खांचे (Grooves) बना देती थी। बाद में जब उसी डिस्क को चलाया जाता, तो सुई उन खांचों के अनुसार कंपन करती और वही ध्वनि फिर से सुनाई देने लगती थी।
ग्रामोफ़ोन ने मनोरंजन की दुनिया में क्रांति ला दी। पहली बार लोगों को घर बैठे संगीत, भाषण और नाटक सुनने का अवसर मिला। 20वीं सदी की शुरुआत में यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। भारत में भी ग्रामोफ़ोन का आगमन ब्रिटिश काल में हुआ और इससे शास्त्रीय संगीत, लोकगीत तथा नाट्य प्रस्तुतियों के संरक्षण में बड़ी सहायता मिली। समय के साथ ग्रामोफ़ोन की जगह रेडियो, टेप रिकॉर्डर, सीडी प्लेयर और फिर डिजिटल संगीत प्रणालियों ने ले ली, लेकिन ध्वनि रिकॉर्डिंग तकनीक के इतिहास में ग्रामोफ़ोन का स्थान आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आविष्कार मानव सभ्यता के उन महान नवाचारों में गिना जाता है, जिसने संगीत और संचार की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।
वैज्ञानिक के बारे में
थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फ़रवरी 1847 को मिलान में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक संघर्षों के बीच बीता। वे औपचारिक शिक्षा में अधिक समय तक नहीं पढ़ सके और उनकी माता ने घर पर ही उनकी शिक्षा का दायित्व संभाला। एडिसन को कम उम्र से ही प्रयोग करने का शौक था। उन्होंने दो विवाह किए। उनकी पहली पत्नी का नाम मैरी स्टिलवेल तथा दूसरी पत्नी का नाम मीना मिलर था। उनके छह बच्चे थे। अत्यधिक श्रवण-दोष (कम सुनाई देना) के बावजूद उन्होंने जीवनभर अनुसंधान और आविष्कारों में स्वयं को समर्पित रखा। 18 अक्टूबर 1931 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके आविष्कार आज भी दुनिया को प्रेरित करते हैं।
