Bareilly : पहले होगा संपत्तियों का सर्वे, फिर मिलेगा मुआवजा और भूखंड
आवास विकास परिषद ने सीबीगंज में लैंड पूलिंग योजना में सर्वे की तैयार की रूपरेखा
बरेली, अमृत विचार। सीबीगंज में 522 हेक्टेयर पर आकार ले रही लैंड पूलिंग योजना को आवास एवं विकास परिषद ने रफ्तार दे दी है। चार प्रमुख सेक्टरों का संशोधित ले-आउट शासन को भेजने के बाद अब जमीनी स्तर पर परिसंपत्तियों की जांच का काम शुरू होने जा रहा है। इसके तहत योजना क्षेत्र में आने वाले किसानों के निर्माण कार्यों का आकलन कर मुआवजा बांटा जाएगा, जिसके तुरंत बाद ही भूखंडों का आवंटन शुरू हो जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक आवास विकास परिषद ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत सड़कों के निर्माण के लिए धरातल पर चिन्हांकन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया है। अधिशासी अभियंता राजेंद्रनाथ राम के मुताबिक, जिन काश्तकारों ने योजना के लिए अपनी अग्रिम सहमति प्रदान की है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। विभाग अब तक तीन सौ से ज्यादा किसानों के लिए भूखंडों की श्रेणी का निर्धारण कर चुका है। योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवास विकास परिषद तीन विशिष्ट सेक्टरों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है, ताकि किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो सके। इधर, परिषद ने बीते सप्ताह ही सेक्टर पांच, छह और सात का संशोधित ले-आउट शासन को प्रेषित किया था, जिसके पास होते ही विकास कार्य पूरी गति पकड़ लेंगे।
अवैध निर्माण पर रखी जा रही नजर
संशोधित ले-आउट शासन को भेजने के साथ ही आवास विकास परिषद अब क्षेत्र में किसी भी नए और अवैध निर्माण को रोकने के लिए मुस्तैद हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन तीन सेक्टरों की फिजिबिलिटी देखी जा रही है, वहां ड्रोन और स्थलीय सर्वे के जरिए यह देखा जाएगा कि ले-आउट भेजने के बाद कोई अवैध कब्जा न हुआ हो। वहीं, सेक्टर चार और छह में 30 मीटर और 25 मीटर चौड़ी मुख्य सड़कों के लिए मार्किंग शुरू कर दी गई है।
आवास आयुक्त ने रद्द किया था पुराना ले-आउट
पिछले दिनों सेक्टर चार, पांच, छह और सात के नियोजन में गड़बड़ी सामने आई थी, जहां 200 से अधिक किसानों की सहमति से प्राप्त 67 एकड़ से अधिक भूमि पर भूखंड सृजित किए जाने थे। वर्चुअल बैठक के दौरान खुलासा हुआ था कि सेक्टर चार और पांच में 80 फीसदी से अधिक भूखंड किसानों को देने के बजाय ग्रुप हाउसिंग, कमर्शियल स्कूल, अपार्टमेंट के लिए आरक्षित कर दिए गए थे। इस मनमानी के कारण अपनी कीमती जमीन देने वाले मूल किसानों के सामने खुद के ही भूखंड आवंटन का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। पता चलने पर आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह ने पुराने ले आउट को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर नए बनाने के निर्देश दिए थे।
