सौर तूफानों से पृथ्वी को बचाएगा कृत्रिम आवरण

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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जून 2026 के महीने के साइंस पत्रिका में एक चौंकाने वाली स्टडी प्रकाशित हुई है, जिसमें धरती को अंतरिक्ष की ओर से आने वाले तेज विकिरण और सूर्य की सतह पर होने वाले घमाकों की वजह से उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफानों की तीव्रता से बचने के लिए एक एयर-बैग बनाने का प्रस्ताव है। सूरज से होने वाले जोरदार धमाके पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से जब टकराते हैं, तो वे रात के आसमान में सिर्फ ऑरोरा या रोशनी की लकीरें ही नहीं बनाते, बल्कि वे पृथ्वी के निकट परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह जिनसे मौसम, अंतरिक्ष वेदर, मिलिट्री के लिए जासूसी एवं पृथ्वी के गर्भ में छिपे हुए खनिज, भू-जल, जंगलों और फसलों का घनत्व मापा जाता है। सूर्य से आने वाले तेज आवेशित कणों की विद्युत चुंबकीय शक्ति के कारण विचलित हो सकते हैं या कुछ देर के लिए पृथ्वी केंद्रों से संपर्क तोड़ सकते हैं या बिलकुल नष्ट भी हो सकते हैं।

पृथ्वी के उपग्रह चांद की परिक्रमा करने वाले अन्वेषण यानों के अलावा सूर्य के निकट भेजे गए सोलर प्रोब्स के इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम को भी अदृश्य विकिरण युक्त सौर-ऊर्जा तूफान खराब कर सकते हैं। सूर्य की सतह पर सक्रिय क्षेत्रों में होने वाले धमाकों से जो कोरोनल मास इजेक्शन या प्लाज्मा तेजी से बाहर निकलता है उसकी विपुल शक्तियुक्त विद्युत चुम्बकीय तूफान पृथ्वी पर बिजली के झटके पैदा करते हैं जिससे बिजली ग्रिड ठप हो जाते। अनुमान है कि ई. सन 1859 के कैरिंगटन इवेंट जैसा, सौर तूफान, जोकि सौ साल में एक बार होने की संभावना होती है, बिजली ग्रिड को ही खरबों रुपए से ज्यादा का नुकसान पहुंचा सकता है। पृथ्वी वासियों के पास बेहतर स्पेस वेदर पूर्वानुमान और पृथ्वी ग्रह एवं अंतरिक्ष के बीच होने वाली अत्यधिक विकिरण गतिविधि से बचाव के लिए टिकाऊ और भरोसेमंद टेक्नोलॉजी के विकास की जरूरत एक अरसे से महसूस की जाती रही है। 

अंतरिक्ष भौतिकीविदों का एक छोटा सा समूह अब कह रहा कि है कि इंसान को सौर तूफानों के असर को कमजोर करने के लिए अपने बिजली और कम्युनिकेशन सिस्टम्स के बचाव के लिए नई तरह की तकनीक विकसित करनी चाहिए स्पेस वेदर पत्रिका के जून 2026 के अंक में छपी एक स्टडी  -टेरेस्ट्रियल स्पेस वेदर प्रोटेक्शन थ्रू ह्यूमन-प्रोड्यूस्ड मास लोडिंग, के हवाले से साइंस पत्रिका ने लिखा है कि शोधकर्ताओं ने स्टॉर्मवाल जैसा एक दिलचस्प प्रस्ताव दिया है जिसमें कृत्रिम उपग्रहों का एक बेड़ा सौर तूफान के पृथ्वी से टकराने से ठीक पहले अंतरिक्ष में सैकड़ों टन गैसें छोड़ेगा। इस प्रस्ताव के लिए इन वैज्ञानिकों ने मॉडल बनाकर इसे कंप्यूटर द्वारा टेस्ट किया है जिसे सिमुलेशन स्टडी कहते हैं। 

बताया गया कि सैटेलाइट्स द्वारा गैसें छोड़ने से बना हुआ यह बनावटी बादल किसी बड़े सौर तूफान की तीव्रता को आधा या उससे भी ज्यादा कम कर सकता है। इससे पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को एक कवच मिल जह्येगा जो कि कार में लगे एयरबैग सरीखा मानें। यह सूर्य से आने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक झटकों को बर्दाश्त करके पृथ्वी की रक्षा करेगा। इसमें कितनी मात्रा में गैस लगेगी, कितनी लागत आएगी और गैस प्राप्त करने का स्रोत क्या होगा, जानना भी महत्वपूर्ण है। कोरोनल मास इजेक्शन से पैदा हुए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तूफान को पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड तक पहुंचने में आम तौर पर एक से तीन दिन लगते हैं। हालांकि बहुत तेजी से होने वाले इजेक्शन पंद्रह करोड़ किलोमीटर का यह सफर सिर्फ 15 से 18 घंटों में भी पूरा कर सकते हैं। क्या इतने समय में पृथ्वी से राकेट दाग कर इसके मैग्नेटिक फील्ड के चारों ओर एक गैसी आवरण बनाना जा सकना संभव होगा। यह विज्ञान कथा सरीखा कथन लगता है जबकि मूल शोध पत्र के 12 पन्नों में दिए गए टेक्निकल विवरण से यह व्यवहारिक और आसान लगता है। इस बारे में इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन के आलावा अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन एन यूरोपियन स्पेस एजेंसी और स्पेस-एक्स जैसी विशेषज्ञ संस्थानों के वैज्ञानिकों की राय मालूम नहीं हुई है।

आम तौर पर, पृथ्वी का खुद का चुंबकीय क्षेत्र इस पर जीवन और मानव गतिविधियों की रक्षा के लिए एक ढाल की तरह काम करता है, जो ज्यादातर सौर हवाओं, और सूरज से लगातार निकलने वाले आवेशित कणों के प्रवाह को डेफ्लेक्ट करता है अथवा मोड़ देता है, लेकिन जब जोरदार सौर तूफान आते हैं, तो पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सूरज के चुंबकीय क्षेत्र से जुड़ता है, जिससे यह सुरक्षा कवच में सेंध लगती है। ऐसा होने से ऊर्जा और चार्ज्ड पार्टिकल्स पृथ्वी के मैग्नेटिक वातावरण में तेजी से घुस आते हैं। ये चार्ज्ड पार्टिकल्स कृत्रिम सैटेलाइट के इलेक्ट्रॉनिक्स को खराब कर सकते हैं और स्पेस स्टेशंस में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ ऊर्जा ऊपरी वातावरण में चली जाती है, जिससे वह गर्म हो जाता है और फैल जाता है। इसके कारण पैदा होने वाला खिंचाव सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा से ज्यादा तेजी से बाहर खींच कर परिक्रमा पथ से विचलित कर सकता है।

 

 

रणबीर सिंह विज्ञान लेखक