मधुमक्खियां बचाएं ताकि धरती पर चलता रहे जीवन

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Published By Anjali Singh
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कहना गलत नहीं होगा कि यदि मधुमक्खियों का अस्तित्व संकट में पड़ता है, तो मानव जीवन, कृषि और पर्यावरण भी गंभीर संकट में आ जाएंगे। इसलिए मधुमक्खियों का संरक्षण केवल और केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं है, बल्कि उनका जीवन प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में कहीं न कहीं मानव अस्तित्व की भी अहम् आवश्यकता है। 

हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने, धरती से रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग को कम करने, जैविक खाद का अधिक उपयोग करने, जैविक खेती अपनाने तथा प्राकृतिक जैव-विविधता को बचाने की दिशा में अपने सामूहिक व यथेष्ठ प्रयास करने होंगे। खेती, जैव-विविधता और खाद्य सुरक्षा में मधुमक्खियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना होगा।

जैव-विविधता और खाद्य-सुरक्षा की रक्षा करना, मधुमक्खियों पर मंडरा रहे खतरों, जैसे कि खेती में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और उनके प्राकृतिक आवासों के विनाश की ओर ध्यान आकर्षित करना, सतत कृषि और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में मधुमक्खी पालन के योगदान को रेखांकित करना आदि शामिल है।

मधुमक्खियों के महत्व की यदि हम बात करें तो ये पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन की प्रमुख आधारशिला मानी जाती हैं। एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 75 प्रतिशत खाद्य फसलें किसी न किसी रूप में परागणकर्ताओं पर निर्भर हैं, जबकि दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत जंगली पुष्पीय पौधों के प्रजनन में परागण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये जैव-विविधता को बनाए रखने में सहायता करती हैं तथा कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। यदि मधुमक्खियां न रहें, तो खाद्य-श्रृंखला और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

सुनील कुमार महला लेखक