बदलते दौर की जरूरत साइकिल और ई-बाइक

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Published By Anjali Singh
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जैसा कि हम आज देख रहे हैं कि हमारे चारों ओर कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य मोटर वाहनों का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि लोग दिखावे, वाहवाही या समाज में सम्मान पाने की चाह में साइकिल और ई-बाइक की तुलना में कारों तथा अन्य मोटर वाहनों को अधिक प्राथमिकता देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों की खपत लगातार बढ़ रही है और वायु प्रदूषण भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जो हमारे देश के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है।

पर्यावरण के लिए अनुकूल  

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स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में विश्वभर में वायु प्रदूषण के कारण लगभग 79 लाख लोगों की मृत्यु हुई। विश्व स्तर पर होने वाली कुल मौतों में से 8 में से 1 से अधिक मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण है। भारत में तो स्थिति और भी गंभीर है। भारत में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या वर्ष 2000 में 14 लाख से बढ़कर वर्ष 2023 में 20 लाख हो गई, जो दो दशकों में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। वायु प्रदूषण विश्व में मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण है। वायु प्रदूषण के कारण स्ट्रोक, हृदय रोग, मधुमेह, फेफड़ों का कैंसर तथा श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी समस्याओं से बचाव के लिए साइकिल और ई-बाइक का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। ई-बाइक एक ऐसा वाहन है, जो बैटरी से संचालित इलेक्ट्रिक मोटर की सहायता से चलता है, जिससे समतल सड़कों के साथ-साथ ऊंचे और ढलान वाले रास्तों पर भी आसानी से यात्रा की जा सकती है। इसके उपयोग से न तो अधिक थकान होती है और न ही अधिक पसीना आता है। इस प्रकार ई-बाइक पर्यावरण के अनुकूल एक बेहतर परिवहन साधन है, लेकिन इसमें साइकिल जितना शारीरिक व्यायाम नहीं होता और बैटरी चार्जिंग पर निर्भरता रहती है। इसके विपरीत साइकिल एक ऐसा वाहन है, जो पूरी तरह मानव शक्ति से चलती है। यह न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करती है, बल्कि पेट्रोल-डीज़ल की खपत घटाकर वायु प्रदूषण को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। भले ही ई-बाइक सुविधा प्रदान करती है, लेकिन स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सरलता की दृष्टि से साइकिल को अधिक बेहतर और टिकाऊ परिवहन साधन माना जाता है।  साइकिल का आविष्कार वर्ष 1817 में जर्मनी के बैरन कार्ल वॉन ड्रेइस द्वारा किया गया था। उनकी बनाई पहली साइकिल को ‘ड्रेजीन’ कहा जाता था। इसमें पैडल नहीं थे और इसे पैरों से धक्का देकर चलाया जाता था।

साइकिल राजधानी

नीदरलैंड को पूरी दुनिया की ‘साइकिल राजधानी’ कहा जाता है। पूरे विश्व में सबसे अधिक साइकिल चलाने वाले देशों में नीदरलैंड  सबसे प्रसिद्ध है। अध्ययनों के अनुसार, नीदरलैंड में लगभग 27 प्रतिशत यात्राएं साइकिल द्वारा की जाती हैं तथा कुछ शहरों में यह प्रतिशत 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। वहां साइकिलों की संख्या देश की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। यह एक ऐसा देश है, जहां हर आयु वर्ग के लोग प्रतिदिन स्कूल, कॉलेज, कार्यालय और बाजार जाने के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं। नीदरलैंड में साइकिल चालकों के लिए अलग साइकिल मार्ग, पुल, सुरंगें तथा साइकिल पार्किंग की उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे साइकिल चलाना सुरक्षित और सुविधाजनक बन जाता है।

जापान में साइकिल महत्वपूर्ण परिवहन

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यदि हम जापान की बात करें तो वहां साइकिल केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 2025 के एक अध्ययन के अनुसार, जापान में लगभग 12 प्रतिशत यात्राएं साइकिल द्वारा की जाती हैं, जो विकसित देशों में अपेक्षाकृत उच्च मानी जाती हैं। एक अन्य अध्ययन में बताया गया है कि जापान के प्रमुख शहरों टोक्यो, ओसाका और क्योटो में साइकिल शहरी परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है। वहां छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और बुज़ुर्ग सभी अपने दैनिक कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करते हैं।

साइकिल चलाने के फायदे

-  यह वैश्विक तापमान वृद्धि को कम करने में सहायक है।

-  यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 5 किलोमीटर साइकिल चलाता है, तो वह एक वर्ष में लगभग 300 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकता है।

-  वर्ष 2011 में फिनलैंड तथा अन्य देशों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय शोध  में पाया गया कि नियमित साइकिल चलाने से शारीरिक फिटनेस में काफी सुधार होता है तथा उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में सहायता मिलती है। एक अध्ययन में ये भी  पाया गया कि नियमित रूप से साइकिल चलाकर काम पर जाने वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा गैर-साइकिल चालकों की तुलना में 46% कम होता है। 

-  इतना ही नहीं, विभिन्न अध्ययनों से यह पता चला है कि प्रतिदिन 30 से 60 मिनट तक नियमित रूप से साइकिल चलाने से मधुमेहके जोखिम को भी कम किया जा सकता है । 

-  अगर आप वजन घटाने और फेफड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के बारे में सोच रहे हैं, तो साइकिलिंग आपके लिए एक प्रभावी उपाय हो सकती है। नियमित रूप से प्रतिदिन 30 मिनट साइकिल चलाने से फेफड़े भी अधिक स्वस्थ एवं मजबूत बनते हैं।

-  यूरोपियन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से साइकिल चलाते हैं, उनमें मानसिक तनाव तथा अवसाद होने की संभावना अपेक्षाकृत कम पाई गई है।

 - The Energy and Resources Institute  की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि अधिक लोग कार्यस्थल तक पहुँचने के लिए साइकिल का उपयोग करें, तो ईंधन की खपत कम होगी और भारत की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है।

- साइकिल चलाने से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बेहतर होता है जिससे मस्तिष्क की सोचने-समझने की क्षमता और स्मरण शक्ति में सुधार होता है। साइकिल केवल एक सस्ता, सरल तथा  टिकाऊ परिवहन का साधन नहीं  बल्कि स्वस्थ जीवन, स्वच्छ पर्यावरण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पेट्रोल-डीज़ल जैसे ईंधन की बचत करती है लगातार प्रदूषण को कम करती है तथा लोगों को स्वस्थ रहने में सहायता प्रदान करती है। यदि हम अपने दैनिक जीवन में साइकिल को अधिक अपनाएं, तो हम न केवल अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

–डॉ. सुहेल हाकिम खान