फुटबॉल विश्व कप को लेकर अमेरिका-ईरान की रस्साकशी

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Published By Deepak Mishra
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2026 फीफा विश्व कप को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच नया विवाद सामने आया है। ईरान के फुटबॉल महासंघ ने आरोप लगाया है कि उसके प्रशंसकों के लिए निर्धारित टिकट कोटा वापस ले लिया गया है। ईरान का कहना है कि यह फैसला खेल भावना के विपरीत है

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धनीश शर्मा, लेखक

 

2026 फीफा विश्व कप को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच नया विवाद सामने आया है। ईरान के फुटबॉल महासंघ ने आरोप लगाया है कि उसके प्रशंसकों के लिए निर्धारित टिकट कोटा वापस ले लिया गया है। ईरान का कहना है कि यह फैसला खेल भावना के विपरीत है और इससे हजारों ईरानी समर्थक प्रभावित होंगे, जो अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए विश्व कप में पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

फीफा के नियमों के अनुसार विश्व कप में भाग लेने वाले प्रत्येक देश के फुटबॉल महासंघ को अपने समर्थकों के लिए मैचों के टिकटों का एक निर्धारित हिस्सा उपलब्ध कराया जाता है। ईरान का दावा है कि उसे मिलने वाला लगभग आठ प्रतिशत टिकट आवंटन वापस ले लिया गया है। ईरानी फुटबॉल महासंघ ने इसे अनुचित बताते हुए कहा है कि इससे उसके प्रशंसकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। ईरान का यह भी कहना है कि खेल को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए और सभी देशों के समर्थकों को समान अवसर मिलना चाहिए।

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका में होने वाले उसके विश्व कप मुकाबलों के लिए निर्धारित टिकट आवंटन रद्द कर दिया गया है। ईरानी फुटबॉल महासंघ का कहना है कि इस फैसले से हजारों समर्थक प्रभावित होंगे, जो अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए विश्व कप में पहुंचने की तैयारी कर रहे थे। ईरान अपना पहला मुकाबला 15 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगा। महासंघ के अनुसार, टिकट कोटा वापस लिए जाने से बड़ी संख्या में प्रशंसकों की मैच देखने की योजना प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, फीफा ने कहा है कि वह इस मामले पर ईरानी फुटबॉल महासंघ के संपर्क में है और समर्थकों के लिए समाधान तलाशने का प्रयास कर रहा है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। ईरान का आरोप है कि टिकट आवंटन में किया गया बदलाव राजनीतिक कारणों से प्रेरित है, जबकि फीफा ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी कारण यह मामला अब केवल टिकट आवंटन तक सीमित न रहकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव से भी जुड़ गया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि विश्व कप जैसे वैश्विक खेल आयोजन पर राजनीतिक संबंधों का असर नहीं पड़ना चाहिए।

इस बार का फीफा विश्व कप कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार इसकी मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं। साथ ही, विश्व कप के इतिहास में पहली बार 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। नए प्रारूप के तहत कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे, जो अब तक के किसी भी विश्व कप में सबसे अधिक हैं।
विश्व कप का उद्घाटन मुकाबला मेक्सिको सिटी में खेला जाएगा, जबकि फाइनल 19 जुलाई को आयोजित होगा।

 48 टीमों वाले नए प्रारूप से एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे उन देशों को भी विश्व कप में जगह बनाने का अवसर मिलेगा, जो पहले कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण बाहर रह जाते थे। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खेल का वैश्विक विस्तार और तेज होगा तथा नए देशों में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ेगी। ईरान की टीम पहले ही विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर चुकी है और उसके समर्थकों को अपनी टीम से काफी उम्मीदें हैं। (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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