दान में सेंध अयोध्या की गरिमा को ठेस
एसआईटी (तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम) का गठन कर 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा भी मामले का संज्ञान लेते हुए ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार पर्यटन है। शायद यही वजह है कि भारत में भी आध्यात्मिक पर्यटन को एक पारंपरिक यात्रा से अनुभव-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र में बदलने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी और योजनाओं के माध्यम से इसे वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों से भारत विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र बन रहा है। काशी कॉरिडोर, बुद्धा सर्किट व अयोध्या का राम मंदिर समेत कई केंद्र विकसित किए गए हैं।
कहना गलत न होगा कि वो दिन दूर नहीं जब भारत आध्यामिक तौर पर पूरे विश्व को न सिर्फ धर्म व शांति का पाठ पढ़ाएगा, बल्कि जीवन में उल्लास भी लौटाएगा। इन सबके बीच राम मंदिर के चढ़ावे और दान में घोटाले के आरोपों ने न सिर्फ केंद्र व प्रदेश सरकार, अपितु करोड़ों रामभक्तों की आस्था को भी आहत किया है। क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की धरती पर कुछ लालची लोगों ने उनके मंदिर को मिले दान में सेंध लगाई है। जिस पर योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत तत्काल एक्शन लिया।
एसआईटी (तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम) का गठन कर 15 दिन में रिपोर्ट तलब की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा भी मामले का संज्ञान लेते हुए ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन की टीम ने 16 जून को राम मंदिर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। इस बीच कई कर्मचारियों और सेवादारों के घरों से नकद बरामद होने की बात सामने आई है, जिनमें से कुछ के पास अचानक महंगी गाड़ियां और फोन मिलने की भी पुष्टि हुई है, लेकिन पारदर्शिता के अभाव और जिम्मेदार लोगों की चुप्पी ने इस संवेदनशील मामले को एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद बना दिया है।
वहीं राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में अयोध्या के संत परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया है कि यह एक प्लान किया गया षड्यंत्र लग रहा है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करना है। जब मामले की जांच अभी जारी है, तब कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए बयान कई सवाल खड़े करते हैं। जिन लोगों ने राम मंदिर का दौरा तक नहीं किया, उन्हें घटना के बारे में इतनी जानकारी कैसे मिली, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
आध्यात्मिक स्थलों को योग, आयुर्वेद और ध्यान (विपश्यना) केंद्रों से जोड़ा गया है। इसके लिए ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे शहरों को विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया गया है। प्रयागराज महाकुंभ और पुरी रथ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों से आस्था अब केवल एक सांस्कृतिक और धार्मिक घटना नहीं रह गई है। यह पूरे भारत में एक प्रमुख आर्थिक चालक, अवसंरचना विकास का उत्प्रेरक और रोजगार सृजनकर्ता के रूप में उभर रही है। घरेलू यात्रा में वृद्धि, बेहतर कनेक्टिविटी, बड़े पैमाने पर अवसंरचना निवेश और प्रमुख तीर्थ केंद्रों के पुनर्विकास के कारण भारत का आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र अभूतपूर्व वृद्धि देख रहा है।
जनवरी 2024 में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद इस परिवर्तन को गति मिली, जिससे तीर्थयात्रियों की संख्या और निवेशकों की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विकास को गति देने वाले प्रमुख धार्मिक स्थल राम मंदिर ने अयोध्या को भारत के सबसे तेजी से बढ़ते तीर्थ स्थलों में से एक में बदल दिया है। हवाई अड्डों, सड़कों, रेलवे, आतिथ्य और शहरी अवसंरचना में भारी निवेश हो रहा है।
सदियों के संघर्ष और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था का प्रतीक है, लेकिन इस पावन स्थान से जुड़े वित्तीय घोटालों और चढ़ावे की चोरी के आरोपों ने एक गहरा नैतिक और सामाजिक संकट पैदा कर दिया है। धर्म के नाम पर एकत्र किए गए धन में हेराफेरी केवल एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि जन-जन की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ है।
जून माह में सामने आए ताजा विवाद में मंदिर में आने वाले दैनिक चढ़ावे, दान-पात्रों की गिनती और करोड़ों रुपये के गायब होने के गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व सांसद विनय कटियार जैसे वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न संतों ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों की संलिप्तता की ओर इशारा किया है। इसके अलावा, ट्रस्ट द्वारा दान की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न करने पर विपक्षी दलों, जैसे समाजवादी पार्टी, कांग्रेस आदि ने भी तीखे सवाल उठाए हैं।
गंभीर होते विवाद और मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई आंतरिक जांच के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। हालांकि आरोपों की व्यापकता को देखते हुए यह जांच कितनी प्रभावी होगी, इस पर संशय बना हुआ है। पूर्व के भूमि खरीद विवादों और वर्तमान चढ़ावे के गबन के मामलों के कारण ट्रस्ट के काम-काज पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रभु राम का मंदिर सत्य, धर्म और मर्यादा का प्रतीक हैं। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि मंदिर ट्रस्ट दान के संपूर्ण ब्योरे और सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक कर सभी अटकलों पर विराम लगाए। एसआईटी की जांच बिना किसी राजनीतिक दबाव के हो और दोषी पाए जाने वाला चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।
जरूरी है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आगे आकर देश, समाज और भक्तों को संतुष्ट करना चाहिए और मंदिर प्रबंधन को त्रुटिहीन बनाना चाहिए। यह समय केवल सफाई देने या राजनीति करने का नहीं है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था को सुरक्षित रखने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करके एक नजीर पेश करने का है।
