12th International Yoga Day: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश भर में योग का उत्सव, रक्षा मंत्री व सेनाओं ने भी बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
नई दिल्ली: देश भर में रविवार को 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बेहद उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। 'बढ़ती उम्र में योग से रहें निरोग' की विशेष थीम के साथ आयोजित इस वैश्विक उत्सव का नेतृत्व देश के शीर्ष नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अलग-अलग राज्यों में मुख्य समारोहों का नेतृत्व करके किया। इसके साथ ही भारतीय सेनाओं के जवानों, रक्षा मंत्री और देश के विभिन्न राज्यों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर योगाभ्यास किया।
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जबलपुर में राष्ट्रपति मुर्मू और कोलकाता में पीएम मोदी ने किया योग
मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गैरीसन मैदान में मुख्य समारोह आयोजित हुआ, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सफेद परिधान में नीले रंग की चटाई पर विभिन्न योग मुद्राएं कर समारोह का नेतृत्व किया। उनके साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी योगाभ्यास में शामिल हुए। मुख्यमंत्री यादव ने इस अवसर पर कहा कि पीएम मोदी के सफल 12 वर्ष के नेतृत्व के साथ 12वां योग दिवस मनाना सौभाग्य की बात है। मध्य प्रदेश के अन्य शहरों जैसे इंदौर (जहाँ हजारों लोगों ने भ्रामरी प्राणायाम किया), भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में भी सामूहिक योग कार्यक्रम हुए।
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दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 'रेड रोड' पर हजारों लोगों की मौजूदगी में योग दिवस समारोह को संबोधित किया और योग किया। उन्होंने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए संतुलित जीवनशैली के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है बल्कि वैश्विक शांति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। पीएम मोदी ने कोलकाता के लोगों को 'स्वच्छता से स्वागत' अभियान के लिए बधाई दी और जोर देकर कहा कि उम्र बढ़ने के साथ हमारी क्षमताएं कम नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें और अधिक लचीला व ऊर्जावान बनना चाहिए।
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रक्षा मंत्री की अपील और सैन्य बलों का अदम्य उत्साह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'अपर शिलांग' में भारतीय वायु सेना के 'एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड' पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि पीएम मोदी के प्रयासों से भारत की यह प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर आज एक वैश्विक जन-आंदोलन बन चुकी है।
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इस बीच, देश की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के जवानों ने भी ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों और समुद्र तटों तक योग सत्रों में हिस्सा लिया। दिल्ली छावनी के करियप्पा परेड ग्राउंड में करीब 3,500 सैन्यकर्मियों, एनसीसी कैडेटों और स्कूली बच्चों ने एक साथ योग किया।
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वायु सेना ने उत्तर में लेह की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में कार निकोबार के समुद्र तटों और पूर्व में तवांग से लेकर पश्चिम में द्वारका तक योग सत्र आयोजित किए। वहीं, भारतीय नौसेना के जवानों ने भी 'शांत मन, मजबूत शरीर, अभियान के लिए तैयार' के संकल्प के साथ योग को अपनी जीवनशैली के रूप में अपनाया, जो कि नौसेना के लिए एक विशेष दिन भी था क्योंकि इसी दिन कोलकाता में तीन स्वदेशी युद्धपोतों (जैसे स्टील्थ फ्रिगेट- दूनागिरि) को नौसेना में शामिल किया जाना है।
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कुल मिलाकर, इस वर्ष का योग दिवस यह संदेश देने में सफल रहा कि योग किसी एक दिन या आयु वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय चेतना की अभिव्यक्ति और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार है।

