वैज्ञानिक फैक्ट : क्यों गिरती है बारिश में आसमान से बिजली
बरसात का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में आसमानी बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली गिरने से कई लोगों की जान चली जाती है। बादलों की तेज गड़गड़ाहट और चमकती बिजली लोगों के मन में भय पैदा कर देती है। ऐसे में यह जानना रोचक है कि आखिर आसमान में बिजली बनती कैसे है और बादल क्यों गरजते हैं?
वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश वाले बादलों के भीतर पानी की बूंदें, बर्फ के कण और जलवाष्प लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। इन टक्करों और तेज हवाओं के कारण बादलों में विद्युत आवेश (इलेक्ट्रिक चार्ज) उत्पन्न हो जाता है। धीरे-धीरे बादलों के अलग-अलग हिस्सों में धनात्मक (पॉजिटिव) और ऋ णात्मक (नेगेटिव) आवेश जमा होने लगते हैं। जब इन विपरीत आवेशों के बीच अंतर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो उसे संतुलित करने के लिए अचानक विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है।
इसी प्रक्रिया के दौरान बिजली की एक शक्तिशाली चमक पैदा होती है, जिसे हम आसमानी बिजली के रूप में देखते हैं। कई बार यह विद्युत धारा बादलों के बीच ही सीमित रहती है, जबकि कभी-कभी इसका मार्ग धरती तक बन जाता है। ऐसी स्थिति में बिजली जमीन पर गिरती है और भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
बिजली चमकने के साथ ही उसके आसपास की हवा का तापमान कुछ क्षणों के लिए हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अत्यधिक गर्मी के कारण हवा तेजी से फैलती है और फिर तुरंत सिकुड़ती है। इस अचानक होने वाले विस्तार और संकुचन से शक्तिशाली ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें हम बादलों की गड़गड़ाहट के रूप में सुनते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि बिजली की चमक पहले क्यों दिखाई देती है और गड़गड़ाहट बाद में क्यों सुनाई देती है। इसका कारण प्रकाश और ध्वनि की गति में अंतर है।
प्रकाश की गति लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है, जबकि ध्वनि की गति सामान्य परिस्थितियों में लगभग 332 मीटर प्रति सेकंड होती है। इसलिए बिजली की चमक हमारी आंखों तक तुरंत पहुंच जाती है, जबकि उसकी आवाज कुछ देर बाद सुनाई देती है। इस प्रकार बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक प्रकृति की एक अद्भुत वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम हैं, जो जितनी आकर्षक दिखाई देती है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है।
